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राजधानी आंदोलनकारी नारायण सिंह बिष्ट को सौंपा प्रदेश अध्यक्ष का पदभार

Chamoli Uttarakhand


गैरसैण। राजधानी गैरसैण के लिए 550 से अधिक दिवस धरना करने वाले 'गैरसैण राजधानी निर्माण अभियान' संगठन के प्रख्यात राजधानी आंदोलनकारी नारायण सिंह बिष्ट को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया हैं। नारायण सिंह बिष्ट के प्रदेश अध्यक्ष बनने से स्थाई राजधानी निर्माण आंदोलन को नई ऊर्जा और नेतृत्व से आंदोलन की राह को धारदार बनने के आसार बने हैं।
उत्तराखंड प्रदेश की स्थाई राजधानी गैरसैंण के ज्वलंत सवाल पर आज गैरसैण राजधानी निर्माण अभियान ने साल 2026 की धमाकेदार शुरुआत की है। गैरसैण राजधानी निर्माण अभियान के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लिए गए निर्णयानुसार आज प्रख्यात राजधानी आंदोलनकारी नारायण सिंह बिष्ट को प्रदेश अध्यक्ष का पदभार सौंपा गया। राजधानी गैरसैण आंदोलनकारी नारायण सिंह बिष्ट को अध्यक्ष बनाए जाने के बाबत पत्र संगठन के युवा संयोजक एवं कोर कमेटी प्रबंधकारिणी सदस्य मदन भंडारी ने सौंपा।
गैरसैण राजधानी निर्माण अभियान के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से प्रमुख रणनीतिकार, "सैनिक शिरोमणि'' मनोज ध्यानी द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में नारायण सिंह बिष्ट को संगठन का अध्यक्ष पद स्वीकार करने हेतु आग्रह पत्र सौंपा गया। इस पत्र में नारायण सिंह बिष्ट का उत्तराखंड राज्य आंदोलन से लेकर राजधानी गैरसैंण आंदोलन तक अभूतपूर्व योगदान का स्मरण करते हुए, उनके नेतृत्व में आगामी निर्णायक अभियान सृजित करने की बात कही गई है। नारायण सिंह बिष्ट ने गैरसैण राजधानी निर्माण अभियान का अध्यक्षीय दायित्व संभालने की जिम्मेदारी के साथ सर्व गैरसैण के प्रति संकल्पबद्ध शक्तियों को एक मंच पर आने का आह्वान किया। नारायण सिंह बिष्ट ने कथन किया कि प्रदेश में स्थाई राजधानी के सवाल को अधर में लटकाकर प्रदेश की अवधारणा से सबसे बड़ा छलावा किया गया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोग जब जब एकसूत्र में बंधकर कोई आवाज बुलंद करते हैं तो उसको रोकने की हिम्मत किसी में भी नहीं है। उन्होंने गैरसैण के पक्ष में सर्व जन समुदाय को पुनः गैरसैण राजधानी निर्माण के पीछे लामबंद होने का आह्वान किया है। संगठन के प्रमुख रणनीतिकार द्वारा हस्ताक्षरित लिखित प्रस्ताव पत्र लेकर आए संगठन के युवा संयोजक एवं केंद्रीय प्रबंधकारिणी कोर कमेटी सदस्य श्री मदन सिंह भंडारी ने बताया कि गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान ने 554 दिवस का निरंतर धरना संचालित करके जिस निर्णायक आंदोलन को देहरादून में चलाया था उसका परिणाम गैरसैण हेतु ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषणा के रूप में आया था। गैरसैण राजधानी निर्माण अभियान ने तब यह उद्घोषणा की थी कि "आधी लडाई जीती है, आधी अभी बाकी है", और अब समय आ गया है कि बाकी अधूरी लड़ाई को जीतकर, गैरसैण को प्रदेश की स्थाई राजधानी बनाई जाए। उन्होंने बताया कि गैरसैंण राजधानी की लड़ाई का मुख्य गुण यह रहा था कि उसने एक कुशल रणनीतिकार के नेतृत्व में सुव्यवस्थित, अनुशासित और सर्व राज्य आंदोलन एवं क्रियाशील संगठनों की शक्तियों को सम्मान प्रदान करते हुए, सफल अभियान चलाया था। जिसका परिणाम सुखद घोषणा के साथ हुआ परन्तु कोरोना उपरांत उन निर्णयों पर जो अनुकूल प्रगति होनी चाहिए़ थी, वह अधर में लटकी पड़ी हैं। हम इन संपूर्ण विषयों पर ठोस आंदोल सृजित करने जा रहे हैं। आज नारायण सिंह बिष्ट को अध्यक्षीय दायित्वभार सौंपने हेतु प्रतिष्ठित गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। जिनमे नवनियुक्त अध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट, युवा संयोजक मदन सिंह भंडारी, मोहन भंडारी (नगर पंचायत अध्यक्ष), बलबीर रावत पूर्व जिला पंचायत सदस्य, हीरा प्रसाद गैरी (प्रतिनिधि मुख्यमंत्री), वीरेंद्र लाल आर्य (क्षेत्र पंचायत सदस्य पांचाली), गैरसैंण राजधानी आंदोलनकारी लक्ष्मण सिंह खत्री, कुनाल मेहरा, संजय नेगी, राहुल नेगी उपस्थित रहे।