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छात्र संघ चुनावों के आंदोलन को कांग्रेस मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि ने दिया समर्थन, भूख हड़ताल स्थल पर पहुंचकर छात्रों के हित में बताए छात्र संघ चुनाव

Uttarakhand


देहरादून (Big News Today)

छात्र संघ के चुनाव कराने की मांग को लेकर छात्रों ने अपने आंदोलन को गंभीर रुख पर मोड़ दिया है। अनिश्चितकालीन धरने को 3 दिन पहले भूख हड़ताल में बदल दिया है। डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून में छात्र भूख हड़ताल पर हैं। छात्रसंघ के चुनाव कराने की मांग को लेकर भूख हड़ताल-धरने पर बैठे छात्रों को कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि ने समर्थन दिया है। रविवार की रात डीएवी पीजी कॉलेज परिसर में भूख हड़ताल कर रहे छात्रों के पास राजीव महर्षि पहुंचे और उनके आंदोलन को समर्थन देते हुए सरकार से छात्र संघ चुनाव कराने की मांग की।

फोटो: डीएवी पीजी कॉलेज में छात्रों के धरने को समर्थन देते हुए राजीव महर्षि

कांग्रेस प्रदेश मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि ने कहा है कि सरकार को छात्र राजनीति को प्रोत्साहित करना चाहिए क्योंकि कॉलेज की राजनीति से ही आगे बढ़कर देश-प्रदेश को अनेक लोकप्रिय नेता विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री के रूप में हमें मिले हैं। महर्षि ने कहा कि छात्र संघ के चुनावों से ही एक लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत छात्रों के प्रतिनिधि निर्वाचित होते हैं और वे छात्रों की समस्याओं के लिए विश्वविद्यालय स्तर तक अपनी बात रखकर छात्र समस्यायों का समाधान कराते हैं। उन्होंने सरकार से चुनाव की मांग करते हुए कहा है कि छात्रहित में सरकार को इस पर सकारात्मक फैसला लेना चाहिए।

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गौरतलब है कि छात्र संघ चुनावों की मांग कर रहे छात्र नेता डीएवी पीजी कॉलेज में 2नवम्बर से धरना आंदोलन पर हैं और 4नवम्बर से उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। आंदोलन कर रहे छात्र नेताओं ने कहा कि उनकी मांग को लेकर शासन या कॉलेज प्रशासन चुप्पी साधे बैठे हैं। आंदोलन में शामिल छात्र नेता अंकित बिष्ट, ऋषभ मल्होत्रा, आकिब अहमद, मनमोहन रावत, गोविंद रावत, राहुल जग्गी, अमन भटनागर, सुमित श्रीवास्तव एवं रितिक नौटियाल आदि शामिल हैं, छात्रों ने कांग्रेस मीडिया प्रभारी के समर्थन देने पर भी आभार जताया है।

फोटो: छात्रों का भूख हड़ताल-धरना, साथ में कांग्रेस मीडिया प्रभारी

उधर, छात्र संघ के चुनाव को लेकर सरकार या शासन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है। मीडिया रिपोर्टस में बताया गया है कि शासन ने इसे विश्वविद्यालय स्तर का मामला बताया है तो वहीं विश्वविद्यालय इस मामले में सरकार की तरफ नजर लगाए हुए हैं। फिलहाल छात्र संघ चुनावों को लेकर किसी का रुख स्पष्ट नहीं दिखाई दे रहा है।