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पेयजल निगम में वरिष्ठताक्रम के मामले में विवाद गहराया, एससी-एसटी के अभियंताओं को प्रमोशन से वंचित रहने की सता रहीं आशंका, हालांकि हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से किया इंकार

Uttarakhand


देहरादून (Big News Today)

उत्तराखंड पेयजल निगम में सीनियरिटी रोस्टर का अब एक नया विवाद चल रहा है जो हाईकोर्ट तक जा पहुंचा है लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए मामले को लोक सेवा प्राधिकरण में ले जाने की सलाह दी है। आइए आपको विस्तार से बताते हैं कि आखिर पेयजल निगम का ये मामला क्या हैI

पेयजल निगम के अपर सहायक अभियंता सुनील कुमार ने एससी-एसटी वर्ग के कर्मचारियों की तरफ से हाईकोर्ट नैनीताल में रिट याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि 100 पॉइंट रोस्टर कैडर के अनुसार होता है जबकि हमारे केस में शासन के आदेश के बाद भी जलनिगम द्वारा रिक्ति आधारित रोस्टर बनाया गया और उसी के आधार पर हमारी वरिष्ठता निर्धारित कर दी। इससे हमे(SC/ST) को वरिष्ठता में नुकसान हो रहा हैं। इस याचिका को मंगलवार को नैनीताल हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस आरसी खुल्बे की डबल बेंच ने सुनवाई से खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता सुनील कुमार को लोक प्रशासन ट्रिब्यूनल में जाने को कहा है।

अपर सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत याचिकाकर्ता सुनील कुमार का कहना है कि चूंकि 100 पॉइंट रोस्टर कैडर अनुसार होता है इसलिए हमने उच्च न्यायालय में 100 पॉइंट रोस्टर कैडर के अनुसार बनाकर उसके आधार पर वरिष्ठता निर्धारित करने को न्यायलय में याचिका दाखिल की थी। परन्तु हाईकोर्ट ने रोस्टर निर्धारण कराने हेतु हमे लोक सेवा प्राधिकरण में याचिका दाखिल करने को कहा है। सुनील कुमार का कहना है कि हम शीघ्र ही public service tribunal में दाखिल करने वाले है। उम्मीद है कि याचिका की सुनवाई उपरांत रोस्टर कराकर हमें वरिष्ठता में इसका लाभ मिल सकेगा।

दरअसल, कहा जा रहा है कि उत्तराखंड पेयजल निगम शासन पर भारी जैसी कहावत चरितार्थ होती दिखाई दे रही है। विदित है कि शासन द्वारा सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली के दिनांक 6/12/2019 को पारित आदेश के क्रम में पेयजल निगम को कनिष्ठ अभियंता सिविल की सीधी भर्ती का रोस्टर बनाने के लिए वर्ष 2020 तथा वर्ष 2021 में मार्गदर्शन दिया गया था। आरोप है कि इसका पालन पेयजल निगम करने को तैयार नहीं है। शासन द्वारा अपने आदेशों के पालन कराने के लिए निगम मुख्यालय को कई बार पत्र लिखकर कनिष्ठ अभियंता सिविल के रोस्टर को बनाए जाने हेतु निर्देशित किया गया है। याचिकाकर्ता सुनील कुमार का कहना है कि निगम मुख्यालय शासन की नहीं सुन रहा है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कनिष्ठ अभियंताओं का तर्क है कि शासन द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार रोस्टर बनाए जाने पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को वरिष्ठता का लाभ मिलेगा । आरोप है कि जलनिगम मुख्यालय में कुछ अधिकारी ऐसा नहीं होने देना चाहते इसलिए शासन के आदेशों की अवहेलना कर SC/ST के कार्मिकों को वरिष्ठता में नीचे रखने हेतु ऐड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनाँक 08/04/2022 को रोस्टर निर्धारण प्रक्रिया को गलत पाए जाने पर इसे सही कराने हेतु याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने को कहा गया था। उक्त निर्णय के आधार पर SC/ST के कनिष्ठ अभियंताओं द्वारा High court में याचिका दाखिल की गई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका को सुनवाई से इनकार करते हुए लोक प्रशासन प्राधिकरण में केस ले जाने को कहा है।

इस मामले में जलनिगम के मुख्य अभियंता एससी पंत कहते हैं कि रोस्टर नियमानुसार किया गया था, मुख्य अभियंता कहते हैं कि किसी का भी अहित नहीं होने दिया जाएगा। उनका कहना है कि हालांकि अभी डीपीसी को लेकर शासन से कोई तिथि की सूचना नहीं है लेकिन जो लोग सहायक अभियंता से अधिशाषी अभियंता के पद की डीपीसी का विरोध कर रहे हैं वो तो अभी सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता के प्रमोशन के लिए एलिजिबल भी नहीं हैं।