Consulting Editor : Mo Faheem ‘Tanha’
कॉठ (Big news today) । जाम्भाणी महायज्ञ के द्वितीय दिवस का आयोजन सोमवार को श्रद्धा, अनुशासन एवं आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। यज्ञाचार्य पूज्य स्वामी रामेश्वरानन्द जी महाराज ने पावन अमावस्या पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए अमावस्या व्रत की आध्यात्मिक महत्ता, धर्ममय जीवन-पद्धति, संयम, सदाचार एवं सत्कर्मों के महत्व पर प्रेरणादायी प्रवचन दिया।
उन्होंने कहा कि अमावस्या व्रत केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन को शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से संतुलित रखने का एक वैज्ञानिक एवं अनुशासित उपक्रम भी है। उपवास, सात्त्विक आहार, इन्द्रिय संयम तथा ईश्वर चिंतन से शरीर को विश्राम, मन को एकाग्रता और जीवन को सकारात्मक दिशा प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि धर्मानुकूल आचरण, सेवा, करुणा और सत्संग ही मानव जीवन को सार्थक एवं कल्याणकारी बनाते हैं।जाम्भाणी पद्धति के अनुसार आयोजित यज्ञीय अनुष्ठान में पूज्य महन्त स्वामी चमनऋषि जी ने पूज्य स्वामी रामेश्वरानन्द जी महाराज के साथ श्रद्धा एवं समर्पण भाव से संपूर्ण हवन-विधान संपन्न कराया। श्रद्धालुओं ने यज्ञाग्नि में आहुतियां अर्पित कर धर्म संवर्धन, विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण एवं लोकमंगल की मंगलकामना की।
इस अवसर पर नीरज कुमार विश्नोई पूर्व प्रधान मा०धर्मपाल सिंह विश्नोई संजीव बिश्नोई , विजयवीर सिंह , ओमवीर सिंह, रामकरण सिंह, धर्मपाल सिंह एवं सुरेन्द्र बिश्नोई सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। मातृशक्ति की ओर से इन्द्रावती‚ कमलेश देवी, गीता देवी, सुनीता देवी, सावित्री देवी सहित बड़ी संख्या में महिल एंव पुरूष श्रद्धालु उपस्थित रहे।।



