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पर्वतीय क्षेत्रों में उम्मीद की नई किरणः आईजी विमला गुंज्याल एवं कर्नल यशपाल नेगी, मुख्यमंत्री धामी ने बताया रिवर्स पलायन का प्रेरणादायक उदाहरण

Dehradun Delhi Mussoorie Uttarakhand


रिवर्स पलायन के प्रेरणादायक उदाहरण बने बिमला गुंज्याल और कर्नल नेगी: मुख्यमंत्री धामी

BIG NEWS TODAY : (देहरादून, 8 जुलाई 2025)
REPORT: Mo Faheem ‘Tanha

उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में रिवर्स पलायन की परिकल्पना अब साकार होती दिख रही है। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) बिमला गुंज्याल और पूर्व कर्नल यशपाल सिंह नेगी को उनकी निर्विरोध ग्राम प्रधान चुने जाने पर बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने इसे “रिवर्स पलायन का एक प्रेरणादायक और सुखद उदाहरण” बताया।

सेवानिवृत्त अधिकारी अब गांव का करेंगे नेतृत्व

पूर्व आईजी बिमला गुंज्याल को पिथौरागढ़ जिले की गुंजी ग्राम पंचायत, जबकि कर्नल यशपाल सिंह नेगी को पौड़ी जिले की बिरगण ग्राम पंचायत का निर्विरोध ग्राम प्रधान चुना गया है। दोनों ही अधिकारी वर्षों तक देश की सेवा करने के बाद अब अपने गांव लौटकर विकास की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान

मुख्यमंत्री धामी ने कहा,

“इन वरिष्ठ अधिकारियों का ग्राम प्रधान चुना जाना पंचायती राज व्यवस्था को नई मजबूती देगा। उनके प्रशासनिक अनुभव से ग्रामीण विकास को नई दिशा मिलेगी।”

उन्होंने उम्मीद जताई कि गुंजी और बिरगण जैसे गांव मॉडल ग्राम पंचायतों के रूप में उभरेंगे और अन्य गांवों को भी प्रेरणा देंगे।

रिवर्स पलायन को मिलेगा बल

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ऐसे उदाहरण यह दर्शाते हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद भी व्यक्ति समाज और गांव की सेवा में बड़ी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने के लिए ग्राम आधारित आजीविका, कृषि, बागवानी और स्वरोजगार के क्षेत्रों में लगातार प्रयास कर रही है।

“हमारा लक्ष्य है कि गांव आत्मनिर्भर बनें और पलायन की प्रवृत्ति को रोका जा सके। सरकार हर ऐसे प्रयास को पूर्ण सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है,” मुख्यमंत्री ने कहा।

पर्वतीय क्षेत्रों में उम्मीद की नई किरण

गौरतलब है कि उत्तराखंड में लंबे समय से पलायन एक गंभीर मुद्दा रहा है। लेकिन अब जब अनुभवी लोग स्वेच्छा से गांव लौटकर नेतृत्व कर रहे हैं, तो यह न केवल सामाजिक बदलाव का संकेत है, बल्कि ग्रामीण विकास की नई संभावनाओं का द्वार भी खोलता है। बिमला गुंज्याल और कर्नल नेगी जैसे उदाहरण यह साबित करते हैं कि यदि इच्छाशक्ति और सेवा का भाव हो, तो रिटायरमेंट के बाद भी समाज के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई जा सकती है। यह रिवर्स पलायन नहीं, बल्कि ‘रूरल रिनेसां’ (ग्राम्य नवजागरण) की ओर एक बड़ा कदम है।