देहरादून
“तेरे मस्त-मस्त दो नैन, मेरे दिल का ले गए चैन” ये गीत तो आपने सुना ही होगा, सोचिए अगर नैन मस्त-मस्त ना हों तो फिर किसी का चैन तो क्या लूटें अपना चैन ही खो जाएगा। आंखे सलामत हैं तो सारा जहान खूबसूरत लगता है, आंखों में दिलबर की तस्वीर बसानी है तो आंखे भी सलामत रखनी पड़ेंगी। गर्मियों और बरसात के मौसम में आंखों की देखभाल जरूरी हो जाती है, और अगर धूल भरा माहौल हो तो ये बड़ी चुनौती होती है। बढ़ती उम्र और कामकाज कर तरीके भी आंखों पर असर डालते हैं। तो कैसे सुंदर , सलोनी अँखियों की देखभाल करें और कैसे बनाये रखें मस्त-मस्त दो नैन, इसको लेकर हमने बात की देहरादून आराघर चौक स्थित आँखों के स्पेशलिस्ट डॉ. बीके ओली से। डॉ. बीके ओली ने आंखों की देखभाल के लिए जो बताया उसको हम अपने पाठकों के लिए नीचे लिख रहें हैं।

डॉक्टर की सलाह
★ सामान्यतः स्वस्थ आँखों में दवा डालने की आवश्यकता नहीं होती । कुछ लोग विश्वास करते है कि दवा डालते रहने से आँखें स्वस्थ रहती है , परंतु ऐसा नहीं है । इसके विपरीत अनावश्यक दवा आँखों में डालने से नुक़सान हो सकता है ।
★ कुछ लोग आँखों में बहुत तेज दवा ( कार्टीसोन) डालते है , इससे श्रणिक आराम तो मिलता है परंतु ये नुक़सान दायक दवा है। इससे ज़्यादा इस्तेमाल से मोतिया बिंद , काला मोतिया बिंद या आंख में ज़ख़्म और मवाद तक पढ़ सकता है । इस तरह की दवा डॉक्टर की सलाह से बताये गये समय तक ही डालनी चाहिए ।
★ यदि आँखों में एसिड, क्षार , चूना या कोई ज़हरीला पदार्थ गलती से चला जाए तो बिना समय गंवाए आपको साफ़ पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए। ये पदार्थ आपके लिए बहुत ख़तरनाक होते हैं अच्छी तरह धोने के बाद इलाज के लिए तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए आंख में एसिड, चूना आदि पढ़ने से आँख की रोशनी जाने का ख़तरा रहता है।
★ स्कूटर या मोटरसाइकिल चलाते समय आँखों को हेलमेट के शीशे या चश्मे से ढक कर बचाव करना चाहिए ताकि धूल, धुआँ या कीट- पतंगे आँखों में न घुस जाए ।
★ वेल्डिंग-ग्राइंडिंग करते समय भी आँखों पर उचित प्रकार के चश्मे लगाने चाहिए ।
★ यदि आँखों में कुछ गिर जाता है और धोने से भी बाहर नहीं आता तो डॉक्टर से उसे निकलवा लें और उचित दवा करें ।
★ यदि आँख में चोट लग जाए तो डॉक्टर की सलाह अवश्य लें ।
★ इस्तेमाल के लिए हमेशा नयी दवा खोलें तथा दवा की शीशी खोलने के एक माह बाद इस्तेमाल ना करे ।
★ दूसरों के द्वारा इस्तेमाल की जा रही दवा का इस्तेमाल न करें।
★ आँखों को सुबह -शाम छींटें मारकर धोए ।
★ टेलिविज़न दूर से देखें आपके और टीवी के बीच 8 feet से कम दूरी न हो ।
★ आंख को ज़्यादा छुएँ या मले नहीं इससे इन्फ़ेक्शन होता है ।
★ कुर्सी पर बैठकर या मेज़ पर पढ़ाई करने की आदत डालें।लेटकर पढ़ने या आंख टेड़ी करके पढ़ने से नुक़सान होता है ।
★ मोबाइल और लेपटॉप पर गेम खेलने से नुक़सान होता है ।
निम्न समय पर आँखें जाँच कराएं ।
★ बच्चे के जन्म पर किसी पैदाइशी ख़राबी पता करने के लिए जांच कराएं
★ बच्चे के आंख में यदि लगातार पानी बहे ।
★ बच्चे की 5 साल की उम्र पर और उसके बाद हर दूसरे साल पर ।
★ बच्चे जो चश्मा पहनते हैं, उनकी हर साल जाँच कराए।
★ बच्चा यदि ब्लैक बोर्ड पर देखने में दिक़्क़त महसूस करता है या पढ़ने में किताब नज़दीक रखता है तो जांच कराएं
★ यदि व्यक्ति टेलिविज़न नज़दीक से देखना पसंद करता है , तो उसकी जांच कराएं
★ 40 साल के बाद हर दूसरे वर्ष आंखों की जांच कराना ठीक रहता है ।
★ आंख में भारीपन या सर दर्द रहने पर जांच करानी चाहिए
★ आँखों का फ़्लू जिसमें आंखें दुखने लगती है काफ़ी तेज़ी से फैलता है जिस आदमी की आंखें दुख रही हो वे अपनी आँख छूकर जिस जगह छूता है वहाँ कीटाणु पहुँच जाते हैं , उस स्थान को छूने से अन्य लोगों में कीटाणु पहुँच जाते हैं अतः अपने आप पर हाथ न लगाएं हाथ मिलाने से भी परहेज़ रखें ।
★ ज़्यादातर लोगों की आँखों में चश्मा क़ुदरती लगता है, आंख में डालने की दवा से या खाने की दवा से चश्मा नहीं उतरता ।
★ देर तक कंप्यूटर पर काम करने वाले व्यक्ति समय- समय से आंख झपकाते रहें , हर 25 मिनट काम करने के बाद पाँच मिनट तक दूर देखें , एंटीक्लेर चश्मा लगाए तथा डॉक्टर द्वारा बतायी गई दवा डालते रहे।
आंखों के स्वास्थ के लिए खान-पान
★ खाने में सलाद , हरी सब्ज़ी व पीले फल खाएं इनमें विटामिन व मिनरल होते हैं , दूध , दालें विशेषकर सोयाबीन में प्रोटीन काफ़ी मात्रा में होता है। इनका सेवन करे।
(Featured Image courtesy: only for Awareness)


