Consulting Editor: Mo Faheem ‘Tanha’
मुनस्यारी, (पिथौरागढ़, Big News Today): विश्वविख्यात भारतीय अन्वेषक एवं महान सर्वेयर पंडित नैन सिंह रावत के नाम पर मुनस्यारी में वर्ष 2020–21 में शुरू किए गए स्मारक भवन के अधूरे पड़े निर्माण को पूरा करने तथा इसे राष्ट्रीय स्तर के “पंडित नैन सिंह रावत स्मारक एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर” के रूप में विकसित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है।
सामाजिक कार्यकर्ता श्रीराम सिंह धर्मशक्तू ने इस संबंध में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को विस्तृत जनहित प्रार्थना-पत्र भेजते हुए स्मारक निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कराने और वर्षों से स्थापित होने की प्रतीक्षा कर रही पंडित नैन सिंह रावत की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक स्मारक परिसर में स्थापित करने की मांग की है। ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्य सचिव, संस्कृति सचिव, पर्यटन सचिव, जिलाधिकारी पिथौरागढ़, उपजिलाधिकारी मुनस्यारी तथा नगर पंचायत मुनस्यारी को भी भेजी गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि मुनस्यारी बस स्टेशन के समीप उपजिलाधिकारी कार्यालय के सामने विधायक निधि से लगभग ₹15 लाख की लागत से स्मारक भवन का निर्माण कार्य वर्ष 2020–21 में प्रारंभ किया गया था, लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी भवन अधूरा पड़ा है। आरोप है कि भवन परिसर उपेक्षित अवस्था में है, जहां झाड़ियाँ उग चुकी हैं तथा भूतल का उपयोग निर्माण सामग्री रखने सहित अन्य गतिविधियों के लिए किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
प्रार्थना-पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पंडित नैन सिंह रावत की प्रतिमा आज तक स्थापित नहीं की गई है। जानकारी के अनुसार प्रतिमा लंबे समय से सुरक्षित स्थान पर रखी हुई है, जिससे उसके संरक्षण को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि भारत सरकार पंडित नैन सिंह रावत के सम्मान में डाक टिकट जारी कर उनके राष्ट्रीय योगदान को मान्यता दे चुकी है। ऐसे में उनकी कर्मभूमि मुनस्यारी में उनके नाम पर निर्मित स्मारक का अधूरा रहना क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने सरकार से मांग की है कि अधूरी परियोजना की उच्चस्तरीय समीक्षा कराई जाए, निर्माण कार्य समयबद्ध ढंग से पूरा कराया जाए, प्रतिमा को शीघ्र स्थापित किया जाए तथा भवन को संग्रहालय, पुस्तकालय, डिजिटल गैलरी, शोध कक्ष और पर्यटक सूचना केंद्र सहित “पंडित नैन सिंह रावत स्मारक एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर” के रूप में विकसित किया जाए। साथ ही भूतल पर निर्मित दुकानों का पारदर्शी तरीके से लीज आवंटन कर स्मारक के रखरखाव की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि मुनस्यारी देश-विदेश के पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है। ऐसे में यदि इस स्मारक को आधुनिक स्वरूप देकर विकसित किया जाता है, तो यह न केवल पंडित नैन सिंह रावत के ऐतिहासिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा, बल्कि सीमांत क्षेत्र में सांस्कृतिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा प्रदान करेगा।
अब स्थानीय लोगों की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं कि लंबे समय से लंबित इस परियोजना को पूरा करने के लिए कब ठोस कदम उठाए जाते हैं।



