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चिकित्सालय रेफरल सेंटर न बनेः स्वास्थ्य मंत्री

Dehradun Uttarakhand


रूद्रपुर/देहरादून, बिग न्यूज़ टूडे। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मंगलवार को डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं की गहनता से समीक्षा की। उन्होंने समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप सभी नागरिकों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिले। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा मुख्य चिकित्साधिकारी आउट सोर्स से स्टाफ नर्स, वार्ड बॉय, टैक्नीशिनों का स्टाफ तैनात करना सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिये कि चिकित्सा सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाये। उन्होंने निर्देश दिये कि शहरी क्षेत्रों में भी वेलनेस सेंटरों की स्थापना की जाये। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि जनता को अस्पतालों के अधिक चक्कर न लगाने पड़े, यदि आवश्यकता हो तो मरीजों को सप्ताह से लेकर एक माह तक की दवाईयॉ उपलब्ध करायी जायें। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि सभी प्रकार की जॉचों की जांचों पर पैनी नजर बनाये रखे, बिना परीक्षण जांच रिपोर्ट नहीं आनी चाहिए, इस हेतु चयनित डायग्नोस्टिक्स की गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखी जाये।
उन्होंने कहा कि चिकित्सालय रेफरल सेंटर न बने। जो भी डॉक्टर मरीज को रेफर करेंगा वह रेफरल रजिस्टर में स्पष्ट शब्दों में कारण अंकित करेगा। उन्होंने चिकित्सालयों से रफर होने वाले प्रकरणों की जॉच हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता व मुख्य चिकित्साधिकारी सदस्य सचिव वाली समिति का गठन करने के निर्देश देते हुए कहा कि समिति रेफरल प्रकरणों की गहनता से जांच करें। उन्होंने निर्देश दिये कि डॉक्टर्स द्वारा बाहरी दवाईयां न खिली जाये और नितान्त आवश्यकता होने पर ही बाहरी दवाई विशेषकर जेनरिक दवाई ही लिखी जायें। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि सभी चिकित्सालयों में मैनेजमेंट स्टाफ की तैनाती की जाये।
सूबे के स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत आज पूरी फॉर्म में देखें। उन्होंने यहां कलेक्ट्रेट में स्वास्थ्य अफसरों की बैठक लेकर उन्हें नसीहत दे डाली, साथ ही सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर दिया। धन सिंह रावत ने निर्देश दिए कि जन्म प्रमाण पत्र अस्पताल से डिस्चार्ज के साथ ही दिया जाएगा, इसके अलावा जिन अस्पतालों में भी स्टाफ की कमी है, वहां पर और आउटसोर्स से पद भरे जाएं। उन्होंने 10 जून को सभी ड्रग इंस्पेक्टरों की बैठक बुलाई है, जिसमें मेडिकल स्टोरों के सत्यापन के निर्देश भी दिए जाएंगे ताकि बिना लाइसेंस के चल रहे मेडिकल स्टोर पर सख्ती की जा सकेगी। इसके साथ ही आयुष्मान का भुगतान भी उन्होंने 7 दिन के भीतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि जिला चिकित्सालय में आने वाले मरीजों में से कम से कम 95 प्रतिशत मरीजों का ईलाज जिला चिकित्सालय में ही हो और जिला चिकित्सालय रेफरल सेंटर बनकर न रह जाये, इसके लिए गैप विश्लेषण करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि चिकित्सालयों में जितना भी कबाड़ है, उसका ऑक्शन किया जाये। उन्होंने कहा कि मोतिया बिन्द का फ्री ऑपरेशन, चश्मा व दवाई फ्री के साथ ही लाने-ले जाने का खर्च भी फ्री रखते हुए एक लाख व्यक्तियों के ऑपरेश्न का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि आपातकालीन सेवा 108 की सर्विस में तेजी लाई जाये और रेस्पोंस टाइम कम किया जाये। उन्होंने कहा कि आपातकालीन सेवा में रेंस्पोंस टाईम अधिकतम 20 मिनट रखा जाये। उन्होंने कहा कि जिला चिकित्सालय में रविवार को भी डायलसिस की सुविधा मुहैया करायी जाये। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि शतप्रतिशत संस्थागत डिलीवरी हों, इस हेतु रणनीति बनाकर कार्य किया जाये। उन्होंने जिला चिकित्सालय में 23 करोड़ रुपए से क्रिटिकल यूनिट स्थापित करने के लिए 2 बीघा जमीन खोजने के भी निर्देश दिए। उन्होंने 2 साल के भीतर मेडिकल कॉलेज का काम पूरा करके शुरू करने की बात भी कही। उन्होंने स्वास्थ्य के अफसरों को चेताया कि डीएम के साथ हर सप्ताह बैठक कर प्रगति रिपोर्ट बताएं। इसके साथ ही उन्होंने जिले भर में संसाधनों की कमी की जानकारी ली और उन्हें पूरा करने के निर्देश दिए। कहा, 20 दिन के भीतर एएनएम, 50 दिन के भीतर नर्सों की नियुक्ति कर दी जाएगी। उन्होंने औषधि निरीक्षक से जिले में लाइसेंस धारी औषधि की दुकानों की जानकारी ली, लेकिन वह सटीक जानकारी नहीं दे सके, उन्होंने इस पर नाराजगी जताई। इसके साथ ही यह भी कहा कि मेडिकल स्टोर में फार्मासिस्ट सफेद कोट पहन के बैठे ताकि उनकी प्रमाणिकता सिद्ध हो सके।

बैठक में रुद्रपुर विधायक शिव अरोड़ा, मेयर रामपाल सिंह, किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, डीएम युगल किशोर पंत, उप जिलाधिकारी प्रत्यूष सिंह, एसीएमओ डॉ0 हरेन्द्र मलिक के अलावा सभी सीएचसी और पीएचसी के प्रभारी मौजूद थे।