Affiliate Disclosure: This article contains affiliate links. As an Amazon Associate we earn from qualifying purchases.

इतिहास बन जायेगी ऐतिहासिक मंसाराम बैंक की बिल्डिंग

Dehradun Uttarakhand


देहरादून। ऐतिहासिक मंसाराम बैंक की बिल्डिंग अब इतिहास के पन्नों का हिस्सा बन कर रहने वाली हैं। लगभग 90 वर्ष पुरानी इस बहुमंजिला इमारत का निर्माण सेठ मनसाराम ने कराया था। इनदिनों ऐतिहासिक मंसाराम बैंक की बिल्डिंग का जर्जर होने पर ध्वस्तीकरण किया जा रहा है, घंटाघर के निकट स्थित मंसाराम बिल्डिंग को शहर की पहली बड़ी व्यावसायिक इमारतों में गिना जाता है। साल 1930-40 के दौरान जब इस बिल्डिंग का निर्माण किया गया था ये इमारत देहरादून की सबसे ऊंची और बहुमंजिला बिल्डिंग में से एक थी। उस दौरान जब ये पांच मंजिला इमारत बनी थी, उस समय आसपास के क्षेत्र में अधिकतर एक या दो मंजिला भवन हुआ करते थे। स्थानीय स्तर पर इस मंसाराम बिल्डिंग के नाम से ख्याति मिली, क्योंकि इस बिल्डिंग में व्यापार और बैंकिंग से जुड़े ऑफिस थे। यही नहीं, मंसाराम बिल्डिंग की सबसे बड़ी पहचान इसके आर्ट-डेको शैली की डिजाइन और लाल रंग का अनोखा स्वरूप था, इसकी रूपरेखा दिल्ली के कनॉट प्लेस में मौजूद इमारतों से प्रेरित होकर बनाया गया था। इस बिल्डिंग में बड़े गलियारे, ऊंचे फ्रंट, सिमेट्रिकल खिड़कियां और लंबा फसाड शहरी आधुनिकता का प्रतीक माने जाते थे। जब इस बिल्डिंग का निर्माण हुआ था उस दौरान राजपुर रोड पर खड़ी ये लाल रंग की इमारत दूर से ही दिखाई दे जाती थी। इस बिल्डिंग की मजबूत ईंट की दीवारें, बाहर की ओर निकली बालकनियां और ऊपर की मंजिलों तक जाती सीढ़ियां, उस दौर की कारीगरी और व्यापारिक आत्मविश्वास को दिखाती थी। इस इमारत की निचली मंजिलों पर तमाम व्यापारिक प्रतिष्ठान थे, जबकि ऊपर की मंजिलें दफ्तरों और अन्य व्यावसायिक उपयोग के लिए दी जाती थी। साथ ही सबसे ऊपर मंजिल पर लोग रहते भी थे। काफी अधिक पुरानी संरचना होने के कारण बिल्डिंग के कई हिस्सों में दरारें पड़ने लगी। हाईकोर्ट के आदेश पर इस जर्जर भवन को सुरक्षा की दृष्टिगत ध्वस्त करने की प्रक्रिया पिछले विगत 17 दिसम्बर 2025 से शुरू हो गई है। ताकि संभावित हादसे को रोका जा सके। हाईकोर्ट के आदेश के बाद, स्थानीय प्रशासन की देखरेख में मंसाराम बिल्डिंग की दीवारों को तोड़ने की कार्रवाई चल रही है। संभावना बताई जा रही है कि अगले एक महीने में यह 90 साल पुरानी बिल्डिंग मलबे में तब्दील हो जाएगी।