देहरादून को नई दिशा देने की कोशिश: मेयर सौरभ थपलियाल के एक वर्ष का कार्यकाल

Dehradun Uttarakhand


Report: MO Faheem 'Tanha'

BIG NEWS TODAY : देहरादून नगर निगम के मेयर के रूप में सौरभ थपलियाल ने जब पदभार संभाला, तब शहर के सामने कई पुरानी और जटिल चुनौतियाँ मौजूद थीं—साफ़-सफाई, ट्रैफिक, जलभराव, पार्किंग, राजस्व और तेज़ी से बढ़ता शहरी दबाव। लगभग एक वर्ष के कार्यकाल के बाद, उनका प्रशासन अब एक स्पष्ट दिशा और कार्यशैली के साथ आगे बढ़ता दिखाई देता है।

युवा नेतृत्व और स्पष्ट विज़न

मेयर सौरभ थपलियाल का नेतृत्व शुरू से ही युवा ऊर्जा और आधुनिक सोच का प्रतीक माना गया। उन्होंने अपने शुरुआती बयानों में “Clean & Green Doon” और जनभागीदारी को प्राथमिक लक्ष्य बताया। उनका मानना रहा कि शहर का विकास केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी से संभव है।

सफ़ाई और शहरी व्यवस्था पर फोकस

अपने पहले वर्ष में नगर निगम ने साफ़-सफाई व्यवस्था को बेहतर करने, कचरा प्रबंधन को व्यवस्थित करने और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया। कई क्षेत्रों में नियमित सफ़ाई, निगरानी और कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर सख़्ती दिखाई दी, जिससे नागरिकों में यह संदेश गया कि नगर निगम अब केवल काग़ज़ों तक सीमित नहीं रहना चाहता।

राजस्व और प्रशासनिक सुधार

नगर निगम के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक राजस्व संग्रह रहा है। मेयर के नेतृत्व में प्रशासन ने प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य स्रोतों से आय बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए, ताकि निगम आत्मनिर्भर बन सके और विकास कार्यों के लिए बाहरी निर्भरता कम हो।
साथ ही, आंतरिक प्रशासन में पारदर्शिता और कार्यसंस्कृति सुधारने की कोशिशें भी देखने को मिलीं।

पार्षदों के साथ समन्वय

नवगठित निगम बोर्ड में बड़ी संख्या में नए पार्षद शामिल हुए। मेयर ने उनके साथ समन्वय और संवाद को महत्व देते हुए यह संदेश दिया कि शहर का विकास सामूहिक प्रयास से ही संभव है। इससे निगम के भीतर निर्णय प्रक्रिया को गति मिली।

चुनौतियाँ अभी भी मौजूद

हालाँकि एक वर्ष में सभी समस्याओं का समाधान संभव नहीं होता। देहरादून जैसे तेजी से फैलते शहर में ट्रैफिक, पार्किंग, जलनिकासी और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियाँ अभी भी नागरिकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। इन मुद्दों पर जनता की अपेक्षाएँ बनी हुई हैं और आने वाले वर्षों में प्रशासन की असली परीक्षा यहीं होगी।

उम्मीदों के साथ आगे का रास्ता

मेयर सौरभ थपलियाल का पहला वर्ष दिशा तय करने और आधार मजबूत करने का रहा है। अब शहरवासियों की नज़रें इस बात पर हैं कि आने वाले समय में यह विज़न ज़मीन पर कितनी तेज़ी और प्रभावी ढंग से उतरता है।

कुल मिलाकर, उनका एक वर्ष का कार्यकाल न तो दावा-प्रधान रहा, न ही निष्क्रिय—बल्कि एक ऐसी शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है, जिसने देहरादून के लिए सुधार, पारदर्शिता और भागीदारी की बात को केंद्र में रखा है।