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पंतनगर की धरती पहले ही हरित क्रांति दे चुकी है, अब शहद, सगंध, श्रीअन्न में भी क्रांति आयेगीः राज्यपाल

Dehradun Delhi Mussoorie Uttarakhand


पंतनगर/उधमसिंह नगर, 10 अक्टूबर, 2025 (Report: Mohd Faheem ‘Tanha’) :

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री का 2047 तक विकसित राष्ट्र एवं आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना अवश्य साकार होगी। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में 118वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी का शुभारंभ राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) द्वारा किया गया। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री तथा सांसद अजय भट्ट, उत्तराखंड सरकार के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में तथा विश्वविद्यालय बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य एवं विधायक रूद्रपुर शिव अरोड़ा, पूर्व विधायक किच्छा राजेश शुक्ला, प‌द्मश्री डा. माधुरी बर्थवाल एवं रुद्रपुर के मेयर विकास शर्मा तथा उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति डा. सतपाल सिंह बिष्ट एवं कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

सर्वप्रथम राज्यपाल द्वारा विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी विवेक नौटियाल के सहयोग से सेमीकंडक्टर लैब शुभारम्भ और नवनिर्मित सभागार का उद्घाटन किया गया। राज्यपाल ने अपने उद्‌बोधन में 118वें किसान मेले के भव्य आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इस मेले में स्टॉलों की संख्या 503 तक पहुंचने पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि पंतनगर की धरती पहले ही हरित क्रांति दे चुकी है और अन्य क्षेत्रों यथा शहद, सगंध, श्रीअन्न में भी पंतनगर की धरती से क्रांति आयेगी। उन्होंने बताया कि कृषि मेले का भ्रमण करते समय विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों का नवाचार के प्रति उत्साह देखकर बहुत प्रसन्नता हुई। इस बात की भी संतुष्टि है कि विद्यार्थी ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग कर रहे हैं।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री का 2047 तक विकसित राष्ट्र एवं आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना अवश्य साकार होगी। आधुनिक डिजिटल तकनीकों जैसे सेमीकंडक्टर, ड्रोन, सेंसर, जीपीएस आदि के कृषि में हो रहे प्रयोग से कृषि को और उन्नत बढ़ाने की संभावना बढ़ी है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप एवं उद्यमिता पर और अधिक बल देना है। उन्होंने विश्वविद्यालय के एक पूर्व छात्र द्वारा दस करोड़ की राशि से उपकरण दिये जाने की प्रशंसा की। विश्वविद्यालय से अबतक 40 हजार से अधिक विद्यार्थी उपाधि प्राप्त कर चुकें है और हर एक विद्यार्थी ब्रांड अंबेस्डर है। विश्वविद्यालय का तीन बार सरदार बल्लभ भाई पटेल पुरस्कार से सम्मानित होना एक बहुत गौरव की बात है।

विश्वविद्यालय की पंतनगर बीज के नाम से अलग पहचान है। यदि हम कृषि की रक्षा करेंगे तो कृषि हमारी रक्षा करेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में संचालित विभिन्न योजनाओं यथा किसान सम्मान योजना, ड्रोन दीदी योजना, महिला विशेष स्वयं सहायता ग्रुप पर भी प्रकाश डाला। इस बात पर उन्होंने बल दिया कि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीक आखरी किसान तक पहुंचनी चाहिए। प्राकृतिक खेती को अपनाकर रसायन मुक्त उत्पादन पर बल देने की अत्यंत आवश्यकता है।

विशिष्ट अतिथि अजय भट्ट ने कृषकों के हित में विश्वविद्यालय के प्रयासों की प्रशंसा की और कृषि मेले के भव्य आयोजन के लिए हार्दिक बधाई दी। पंतनगर विश्वविद्यालय देश के किसानों के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। यहाँ की तकनीकी उपलब्धियों और अनुसंधान कार्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में किसान की भूमिका सबसे अहम है।

विशिष्ट अतिथि कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अपने उदबोधन में कहा कि हम पहले विदेशों से अन्न का आयात करते थे जिसकी क्वालटी बहुत ही खराब होती थी परन्तु हम उसे खाने के लिए मजबूर थे। आज देश की 1.4 अरब जनसंख्या को ही नहीं अन्न मिल रहा बल्कि हमारे द्वारा 89 देशों को खाद्यान्न का निर्यात भी हो रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय को 361वें से 209वें रैंक पर लाने के लिए कुलपति के प्रयासों की प्रशंसा की।

कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए इस किसान मेले में पांच सौ से अधिक आये स्टॉल के बारे में बताते हुए पंतनगर किसान मेले की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारे वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी पूरे तन-मन से समर्पण की भावना से योगदान दे रहे है और विश्वविद्यालय द्वारा विकरित तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने के लिए सदैव तत्पर है।

निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. जितेन्द्र क्यात्रा द्वारा बताया गया कि मेले में पाच सी से अधिक स्टॉल लगे हैं और इस वर्ष 30 से 35 हजार कृषकों की मेले में आने की संभावना है। लगाये गये स्टॉलों में कृषि यंत्र, जैविक उत्पाद, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, दुग्ध उत्पाद, पुष्म एवं सब्जी की नवीन प्रजात्तियाँ, ड्रोन तकनीक, सेंसर आधारित कृषि प्रणाली, तथा स्मार्ट कृषि उपकरणों का प्रदर्शन किया गया है। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा घरेलू उत्पादों जैसे जैम, जेली, पापड, अचार, बेकरी उत्पाद, बडियों, तथा हस्तशिल्प सामग्रियों का प्रदर्शन किया गया है।

निदेशक शोध डॉ. सुभाष चंद्रा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर मचासीन अतिथियों द्वारा विभिन्न कृषि साहित्यों का विमोचन किया गया तथा उत्तराखण्ड के विभिन्न जिलों के कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से चयनित 12 प्रगतिशील कृषकों को सम्मानित किया गया। गांधी हाल में जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसडीएम, अधिष्ठाता, निदेशकगण, संकाय सदस्य, किसान, विद्यार्थी, वैज्ञानिक, शिक्षक, अधिकारी, विभिन्न कम्पनियों के प्रतिनिधि एवं फ्रांस से आये 9 विद्यार्थियों के दल ने भी प्रतिभाग किया।