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उत्तराखंड में अवैध नशा मुक्ति केंद्रों पर सरकार का शिकंजा

Dehradun Delhi Mussoorie Uttarakhand


  • धामी सरकार का ’’नशा मुक्त उत्तराखंड संकल्प’’ होगा साकार, स्वास्थ्य विभाग ने तेज़ की कार्रवाई
  • बिना पंजीकरण के चल रहे केंद्रों को चिन्हित कर किया जाएगा बंद, आर्थिक दंड सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी- डॉ आर राजेश कुमार
  • स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की बैठक में कई अहम फैसलों पर लगी मुहर

“नशा मुक्त उत्तराखंड” के लिए सख्त एक्शन मोड में धामी सरकार, अवैध नशा मुक्ति केंद्र होंगे बंद

📍 BIG NEWS TODAY :(देहरादून, 11 जुलाई 2025)।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार प्रदेश को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने के लिए सख्त कदम उठा रही है। “नशा मुक्त उत्तराखंड” को धरातल पर उतारने हेतु बहुस्तरीय रणनीति के तहत अब सरकार अवैध नशा मुक्ति केंद्रों के विरुद्ध सीधे कठोर कार्रवाई के मूड में है।

🔎 सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार जिला स्तरीय निरीक्षण टीमों के गठन के निर्देश

राज्य सचिवालय देहरादून में सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में नशा मुक्ति केंद्रों की स्थिति, पंजीकरण, निरीक्षण और मानकों की समीक्षा की गई।

डॉ. कुमार ने निर्देश दिए कि मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 के तहत सभी जिलों में जिला स्तरीय निरीक्षण टीमें तत्काल गठित की जाएं। यह टीमें हर नशा मुक्ति केंद्र का निरीक्षण करेंगी। जो संस्थान पंजीकृत नहीं हैं या न्यूनतम मानकों का पालन नहीं करते, उन्हें आर्थिक दंड के साथ तत्काल बंद किया जाएगा।

🛑 अवैध नशा मुक्ति केंद्रों पर सख्त कार्रवाई

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में बिना पंजीकरण और मानकों से रहित नशा मुक्ति केंद्रों को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

❝ मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। ❞
उन्होंने कहा कि सभी संस्थान जो मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं, उन्हें चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई और आर्थिक दंड के साथ सील किया जाएगा।

🗣️ जन जागरूकता को बनाया जाएगा अभियान का आधार

डॉ. आर. राजेश कुमार ने यह भी कहा कि “नशा मुक्त उत्तराखंड” अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन बन चुका है। उन्होंने प्रदेश की जनता और सभी सरकारी विभागों से इसमें सहयोग की अपील की।
ग्राम से लेकर शहर स्तर तक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

🧠 मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का होगा सशक्तीकरण

बैठक में राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की वर्तमान गतिविधियों की समीक्षा की गई और 2017 अधिनियम के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार हेतु अग्रिम कार्य योजना प्रस्तुत की गई।
सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राधिकरण को और अधिक सशक्त, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया जाए।

👥 बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी:

  • डॉ. आर. राजेश कुमार – सचिव, स्वास्थ्य
  • डॉ. सुनीता टम्टा – महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य
  • डॉ. शिखा जंगपांगी – मुख्य कार्यकारी अधिकारी
  • डॉ. सुमित बरमन – संयुक्त निदेशक
  • डॉ. पंकज सिंह – सहायक निदेशक
  • राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के अन्य सदस्यगण

📌 निष्कर्ष:

धामी सरकार की प्रतिबद्धता अब कागजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर संगठित, सशक्त और तीव्र कार्रवाई प्रारंभ हो चुकी है। यह स्पष्ट संकेत है कि उत्तराखंड में अब नशे के कारोबार और उससे जुड़ी अव्यवस्थित संस्थाओं के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।


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