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मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल देहरादून के डॉ योगेंद्र सिंह, एसोसिएट डायरेक्टर- कार्डियोलॉजी ने 63 वर्षीय ह्रदय रोगी को बचाने के लिए अनूठी प्रक्रिया से किया इलाज, दिया दूसरा जीवन , जानिए कैसे किया इलाज

Uttarakhand


देहरादून ( Big News Today)

उत्तराखंड के प्रमुख स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं में से एक, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, देहरादून ने एक 63 वर्षीय वृद्ध हृदय रोगी के जीवन को बचाने के लिए एक उच्च तकनीक और अनूठी प्रक्रिया से इलाज किया, जिसे लगातार ओपन हार्ट सर्जरी (बाईपास सर्जरी) की सलाह दी जाती रही थी।
यह उच्च तकनीक और अनूठी प्रक्रिया देहरादून के प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ योगेंद्र सिंह, एसोसिएट डायरेक्टर- कार्डियोलॉजी द्वारा की गई।

63 वर्षीय वृद्ध पुरुष सावन सिंह (बदला हुआ नाम) सांस लेने में तकलीफ और पसीने की शिकायत के साथ मैक्स अस्पताल, देहरादून आये थे। उनको 2021 में उनके हार्ट में 2 स्टेंट पड चुके थे । उन्हें पहले प्राथमिक चिकित्सा के लिए उनके घर के पास एक स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया था जहाँ से उन्हें मैक्स अस्पताल, देहरादून में रेफर कर दिया गया था।

अस्पताल लाये गए रोगी सावन सिंह (बदला हुआ नाम) की जाँच करने पर पता चला दो धमनियों 100% ब्लॉक है , जिसके कारण हृदय को बहुत नुकसान होता है इसीलिए सांस लेने में तकलीफ, पसीना और मरीज को राहत न मिलने पर मैक्स अस्पताल, देहरादून रेफर कर दिया गया।

हर कोई इस केस के लिए ओपन हार्ट सर्जरी (बाईपास सर्जरी) का सुझाव दे रहा था, लेकिन जब उन्होंने डॉ योगेंद्र सिंह से परामर्श किया, तो उन्हें राहत मिली क्योंकि उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि वह मरीज की जान बचाएंगे और बिना बाईपास सर्जरी के ब्लॉकेज खत्म कर देंगे। मैक्स अस्पताल देहरादून में उन्हें तुरंत जाँच प्रक्रिया के लिए ले जाया गया। जहा डॉ योगेंद्र सिंह ने देखा कि उनकी धमनियों में से एक सीटीओ-क्रोनिक टोटल ऑक्लूजन, लंबे समय से पूर्ण ब्लॉक (100%) है।

इस सीटीओ में एंजियोप्लास्टी एंटेग्रेड वायर एस्केलेशन तकनीक (एडब्ल्यूई) का उपयोग किया गया जिसमें माइक्रोकैथेटर के मदद से विशेष सीटीओ तारों का उपयोग किया गया निरंतर ड्रिलिंग और स्लाइडिंग तकनीक के साथ माइक्रो-चैनल लगे हुए थे जिसके परिणामस्वरूप ट्रू लुमेन सफल वायरिंग हुई,

वायरिंग के बाद सीटीओ तारों को वर्क हॉर्स वायर से बदल दिया गया और बाद में बैलूनिंग और स्टेंट इम्प्लांटेशन किया गया।

इस प्रकार की तकनीक में ओक्लुशन और कैल्सीफिकेशन के इलाज के लिए विशेष विशेषज्ञता और जापानी तकनीकों और हार्डवेयर की आवश्यकता होती है। आमतौर पर इस प्रकार के मामलों में ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है लेकिन मरीज इस सर्जरी से बचना चाहता था। रोगी को इलाज के लिए ले जाने से पहले सह-रुग्णता के कारण उच्च जोखिम के बारे में सूचित किया गया और उसी के लिए सहमति ली गई।
विशेषज्ञो के अनुसार ऐसे मामलों के लिए उन्नत उपकरण, कुशल सीटीओ टीम और उन्नत आईसीयू बैकअप की आवश्यकता होती है जो केवल मैक्स अस्पताल, देहरादून में उपलब्ध है। मैक्स देहरादून में उन्नत सेटअप ने डॉक्टरों की इलाज के दौरान बहुत मदद की और यह ऑपरेशन सफल रहा और मरीज को अब स्वस्थ करके घर भेज दिया गया है।