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Breaking-: “मंत्री जी टाईट हैं”: मीटिंग से बाहर निकलते हुए एक अफ़सर ने फुसफुसाया समाज कल्याण मंत्री चंदनराम दास के बारे में

Uttarakhand


देहरादून (Big News Today)

धामी सरकार के मंत्रियों ने अपने -अपने विभागों में कामकाज शुरू कर दिया है। परिवहन और समाज कल्याण मंत्री चन्दन राम दास ने भी विभागीय अधिकारियों को बुलाकर विधानसभा कार्यालय में बैठक ली। परिवहन और समाज कल्याण विभाग के तमाम अधिकारियों ने मंत्री जी को बधाई और शुभकामनाएं भी दीं और साथ ही विभाग के बारे में भी बताया। विभागीय समीक्षा के दौरान मंत्री जी ने विभागीय अफसरों को अपने तेवर भी दिखा दिए हैं। परिवहन विभाग को घाटे से उभारने पर फोकस किया तो वहीं जनजाति कल्याण की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गयी। बैठक में उन्होंने निर्देश दिये कि प्रत्येक जनजाति क्षेत्र का समग्र विकास किये जाने की आवश्यकता है और जनजाति कल्याण की योजनाओं हेतु भारत सरकार से अधिक से अधिक धनराशि प्राप्त किये जाने हेतु निर्देशित किया गया। मंत्री चन्दनराम दास ने अधिकारियों से सख्त और स्पष्ट तौर दर्शा दिया है कि विकास योजनाओं में कोताही सहन नहीं होगी। काफी देर चली बैठक के बाद जब अफसर कार्यालय से बाहर निकले तो एक अफ़सर को ये फुसफुसाते हुए सुना गया कि “मंत्री जी बहुत टाईट हैं”। इससे इस बात के साफ संकेत मिलते हैं कि भविष्य में मंत्री चंदनराम दास को हल्के में लेने वाले अधिकारी को खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है।

योजना की समीक्षा के दौरान मंत्री द्वारा यह भी निर्देश दिये गये कि अटल आवास योजना में पर्वतीय क्षेत्र में रुपये 38000/- तथा मैदानी क्षेत्र में रुपये 35000/- की धनराशि अत्यन्त कम है। इसको बढ़ाने के लिए योजना में रु॰1,20,000/- की धनराशि किये जाने हेतु निर्देशित किया गया।

इसके अतिरिक्त मंत्री चन्दनराम दास द्वारा यह निर्देश भी दिये गये हैं कि जनजाति के दूरस्थ क्षेत्रों में विद्यालयों के समीप जनजाति छात्रावासों का निर्माण किया जाये, जिसमें आवासीय, भोजन की व्यवस्था हो, जिससे छात्र/छात्रा शिक्षा से वंचित न हो सके।

मंत्री के संज्ञान में अधिकारियों द्वारा यह भी लाया गया कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय बाजपुर में भूमि में मा॰ सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश पारित किया गया है, जिससे विद्यालय के भवन का निर्माण नहीं हो पा रहा है। मंत्री जी ने निर्देश दिये कि बाजपुर में अतिरिक्त भूमि का विकल्प देखते हुए चयन की कार्यवाही की जाये। साथ ही जनजाति क्षेत्रों में स्वरोजगार एवं रोजगार के अवसर प्रदान किये जाने हेतु विस्तृत प्रस्ताव भारत सरकार को प्रेषित किये जाये, जिससे पलायन को रोका जा सके।