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गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर, लैंसडौन में त्रिभाषी शब्दकोश का विमोचन

Dehradun Uttarakhand


देहरादून। आज गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर, लैंसडौन के सभागार में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि के रूप में फ्रेंच–अंग्रेज़ी–हिंदी त्रिभाषी शब्दकोश का औपचारिक विमोचन किया गया। इस शब्दकोश के लेखक धर्म सिंह फर्स्वाण एवं रोशनी फर्स्वाण हैं।
शब्दकोश का विमोचन ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी, वीएसएम, कमांडेंट, गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर द्वारा किया गया। इस गरिमामय समारोह में गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट के वरिष्ठ अधिकारी एवं सैनिक उपस्थित रहे। साथ ही पूर्व कर्नल ईश्वर सिंह फर्स्वाण तथा अनेक अन्य सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी भी समारोह में सम्मिलित हुए।
गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर में इस शब्दकोश के विमोचन का उद्देश्य अत्यंत महत्वपूर्ण एवं सार्थक है। रेजीमेंट के अनेक अधिकारी एवं सैनिक संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की शांति स्थापना मिशनों के अंतर्गत विभिन्न देशों में सेवा के लिए प्रतिनियुक्त किए जाते हैं, जहाँ फ्रेंच भाषा का ज्ञान अत्यंत आवश्यक होता है। इसके अतिरिक्त, सैन्य उपकरणों की खरीद, आधिकारिक यात्राओं, संयुक्त सैन्य अभ्यासों तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के दौरान भी फ्रांस एवं अन्य फ्रेंच-भाषी देशों के साथ संवाद की आवश्यकता होती है। इस संदर्भ में फ्रेंच भाषा का ज्ञान व्यावहारिक और व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है।
उल्लेखनीय है कि फ्रेंच भाषा विश्व के लगभग 40 देशों की मातृभाषा या आधिकारिक भाषा है। इसके अलावा, अंग्रेज़ी के बाद फ्रेंच कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों की द्वितीय आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त है। ऐसे में यह त्रिभाषी शब्दकोश न केवल सैन्य अधिकारियों और सैनिकों के लिए, बल्कि विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं विदेशी भाषाओं में रुचि रखने वाले अध्येताओं के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने लेखकों के प्रयासों की सराहना करते हुए इस शब्दकोश को भाषा के माध्यम से वैश्विक संवाद को सशक्त बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया। इस पुस्तक का एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य हिंदी भाषा के वैश्विक प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है। हिंदी भाषा के विशाल भाषी समुदाय को ध्यान में रखते हुए यह भी विचार व्यक्त किया गया कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलना चाहिए। यह शब्दकोश फ्रेंच-भाषी देशों में हिंदी सीखने के इच्छुक लोगों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
समारोह का समापन राष्ट्रीय सेवा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भाषाई ज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए एक प्रेरणादायक संदेश के साथ किया गया।