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वनाग्नि: तो क्या विभागीय अफसरों की मिलीभगत भी हो सकती है वनों की आग में? पढ़िए क्यों उठा ये बड़ा सवाल!

Uttarakhand


फ़ोटो-: सुबोध उनियाल , वन मंत्री

देहरादून (Big News Today)

गर्मियों का मौसम शुरू हो चुका है, ऐसे में अब पहाड़ों के जंगलों में आग की चिंता भी सताने लगी है। हालांकि बताया जा रहा है कि अभी जंगलों में आग की कोई घटना नहीं घटी है। जंगलों में आग को लेकर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने एक बड़ा बयान दिया है, सुबोध उनियाल का कहना है कि जंगलों में आग लगने की घटनाएं कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान बहुत कम हुई हैं। लगभग 50फीसदी की आग लगने की घटनाओं में कमी देखी गई है, लेकिन ये ऐसा क्यों हुआ इसका परीक्षण कराया जाएगा। क्योंकि लॉक डाउन में ना तो हवा चलने से रुकी और गर्मी का मौसम भी रहा है लेकिन वनाग्नि की घटनाएं कम होना जहां राहत की बात है वहीं इसका परीक्षण भी कराया जाएगा कि आख़िर ये कैसे सम्भव हुआ ? क्या मौसम मेहरबान रहा था या कुछ अन्य कारण रहे थे। मीडिया द्वारा वन विभाग के स्थानीय अफसरों की भूमिका संदिग्ध हो सकती है या नहीं इस प्रश्न को लेकर मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि सब बातों का परीक्षण किया जायेगा कि आखिर क्या-क्या कारण रहे हैं जो पिछले वर्षों में कोरोना कॉल के लॉकडाउन के दौरान वनों की आग में आधे की कमी कैसे आयी, उस परीक्षण के आधार पर भविष्य में वनाग्नि रोकने के प्लान पर काम किया जाएगा।

लॉक डाउन में वनों की आग में कमी होने को देखते हुए एक सवाल खड़ा हो रहा है कि जंगलों में आग की घटनाओं को लेकर क्या किसी स्तर पर अफसरों की भूमिका या इन्वॉल्वमेंट या लापरवाही भी रहती है? मंत्री सुबोध उनियाल ने वनाग्नि रोकने में स्थानीय लोगों की भूमिका को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। साथ ही कहा है कि अभीतक इसवर्ष वनों की आग की कोई घटना नहीं हुई है। वह विभाग ने रोकथाम की अपनी तैयारियां की हैं,अफसरों को इस पर गंभीरता से नजर बनाए रखने और तुरंत एक्शन के लिए निर्देशित किया गया है।