Consulting Editor : Mo Faheem ‘Tanha’
देहरादून, 23 अक्टूबर(Big news today)। आंगनबाड़ी कार्यकत्री/सेविका कर्मचारी यूनियन उत्तराखंड (सीटू) के बैनर तले आज जनपद देहरादून के विभिन्न विकासखंडों, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से आई हजारों आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर विशाल प्रदर्शन करते हुए सचिवालय कूच किया।
कार्यक्रम की शुरुआत गांधी पार्क में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं के एकत्रीकरण के साथ हुई। देहरादून के विभिन्न ब्लॉकों एवं क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पहुंची महिलाओं ने अपनी मांगों को लेकर एकजुटता प्रदर्शित की। गांधी पार्क में आयोजित सभा को विभिन्न श्रमिक संगठनों के पदाधिकारियों ने संबोधित किया। इसके पश्चात गांधी पार्क के मुख्य गेट से हजारों आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं ने सचिवालय की ओर कूच किया।
इस आंदोलन का नेतृत्व प्रांतीय महामंत्री चित्रकला, प्रांतीय कोषाध्यक्ष लक्ष्मी पंत, जिला अध्यक्ष रजनी गुलेरिया, जिला कोषाध्यक्ष मनीषा एवं जिला महामंत्री सुनीता रावत सहित यूनियन के अन्य पदाधिकारियों ने किया।
सीटू नेताओं ने किया आंदोलन का समर्थन
गांधी पार्क में आयोजित सभा में मुख्य वक्ताओं के रूप में सीटू के जिला महामंत्री लेखराज, जिला सचिव हिमांशु चौहान तथा जिला उपाध्यक्ष कृष्ण सिंह गुनियाल सहित अन्य श्रमिक नेताओं ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को संबोधित किया।
वक्ताओं ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां एवं सहायिकाएं महिला एवं बाल विकास की विभिन्न योजनाओं को जमीनी स्तर पर संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, प्रारंभिक बाल शिक्षा तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में उनका महत्वपूर्ण योगदान है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सम्मानजनक मानदेय एवं पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही है।
वक्ताओं ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच वर्तमान मानदेय पर परिवार का भरण-पोषण करना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने सरकार से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं की न्यायोचित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
सीटू नेताओं ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के संघर्ष को व्यापक श्रमिक हितों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए उनके आंदोलन को समर्थन देने तथा उनकी मांगों को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाने की बात कही। उन्होंने उपस्थित कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने तथा संगठन की एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में मांग की गई कि न्यूनतम मानदेय 26,000 प्रतिमाह किया जाए। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं का न्यूनतम मानदेय 26,000 प्रतिमाह निर्धारित किया जाए। यूनियन ने कहा कि वर्तमान महंगाई के दौर में मिल रहा मानदेय अत्यंत कम है। अनेक महिलाएं इसी सीमित मानदेय से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। अतः मानदेय में शीघ्र बढ़ोतरी की जाए। ग्रेच्युटी एवं सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जाए।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को ग्रेच्युटी का लाभ प्रदान किया जाए तथा सामाजिक सुरक्षा संबंधी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि वर्षों से सेवाएं दे रही महिलाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके।
मुख्यमंत्री के ओएसडी ने दिया आश्वासन। सचिवालय कूच के दौरान मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी दिलबर सिंह दानू ज्ञापन प्राप्त करने पहुंचे। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं की मांगों को सुना और आश्वासन दिया कि नवंबर 2026 के प्रथम सप्ताह में यूनियन के प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से मुलाकात कराई जाएगी।
साथ ही मानदेय में बढ़ोतरी की मांग के संबंध में भी सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं की मांगें उनके सम्मान, आर्थिक सुरक्षा एवं भविष्य से जुड़ी हैं। संगठन को उम्मीद है कि प्रदेश सरकार इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।
संगठन ने स्पष्ट किया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं के अधिकारों, सम्मानजनक मानदेय तथा सामाजिक सुरक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा और उनकी मांगों को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाता रहेगा।
इस अवसर पर सीटू के जिला महामंत्री लेखराज, उपाध्यक्ष कृष्ण गुनियाल, भगवंत पयाल, सचिव हिमांशु चौहान, यूनियन की महामंत्री चित्रकला, कोषाध्यक्ष लक्ष्मी पंत, जिला अध्यक्ष रजनी गुलेरिया महामंत्री सुनीता रावत, मनीषा राणा, ऊषा भंडारी, अनुराधा, तारा बिष्ट, अनीता शाही, शास्तेश्वरी, छाया रचना शोभा, बबली, गीता पाल, रीना, विमला, भंडारी बसंती, मधु बर्त्वाल , सीमा पाल, आशा जोशी, सीमा सिंह , आशा ध्यानी हेमा, आशापुरम अनीता शाही,देवेश्वरी, पिंकी, रश्मि, कृष्णा चंदेल, संगीता आदि सैकड़ो की संख्या में उपस्थित थे।




