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उत्तराखंड की सियासत में राजीव महर्षि: छात्र राजनीति के संघर्ष से प्रदेश संगठन तक

Dehradun Delhi Mussoorie Uttarakhand


देहरादून की सियासत में राजीव महर्षि: छात्र राजनीति से संघर्ष एवं कांग्रेस संगठन तक का स

Consulting Editor: Mo Faheem ‘Tanha’

देहरादून। (BIG NEWS TODAY) (Report By: Neha Goyal)।  राजधानी देहरादून की राजनीति में कुछ चेहरे ऐसे हैं जिनकी पहचान किसी एक चुनाव या किसी एक पद से नहीं, बल्कि लंबे राजनीतिक सफर और संगठन के साथ लगातार सक्रियता से बनी है। राजीव महर्षि भी ऐसा ही एक नाम हैं। छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले महर्षि आज उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तक पहुंच चुके हैं।

अगस्त 2026 में घोषित उत्तराखंड कांग्रेस की नई कार्यकारिणी में राजीव महर्षि को प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। यह नियुक्ति उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पहले वे प्रदेश कांग्रेस की मीडिया टीम में मीडिया प्रभारी, चीफ मीडिया कोऑर्डिनेटर और मीडिया चेयरमैन जैसी जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं।

डीएवी से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार राजीव महर्षि देहरादून से जुड़े हुए हैं और डीएवी कॉलेज की छात्र राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर एनएसयूआई और युवा कांग्रेस से आगे बढ़ा। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौर में भी उनकी सक्रिय भागीदारी का उल्लेख मिलता है। छात्र और युवा राजनीति के दौर में ही उन्होंने जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को उठाने की शुरुआत की और धीरे-धीरे कांग्रेस संगठन में अपनी जगह मजबूत की। यही लंबा संगठनात्मक अनुभव आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान बना। वे ऐसे नेता के तौर पर सामने आए जो पार्टी के कार्यक्रमों, आंदोलनों और राजनीतिक अभियानों में लगातार सक्रिय रहे।

कांग्रेस की आवाज को मीडिया तक पहुंचाने वाला चेहरा

राजीव महर्षि की सबसे प्रमुख पहचान उत्तराखंड कांग्रेस के मीडिया चेहरे के रूप में बनी। कई वर्षों तक उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी और बाद में मीडिया चेयरमैन के रूप में पार्टी का पक्ष मीडिया के सामने रखा। 2021 में कांग्रेस की राष्ट्रीय वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी उन्हें सम्मानपूर्वक उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी के रूप में उल्लेखित किया गया।

2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्हें कांग्रेस की मीडिया टीम का चीफ कोऑर्डिनेटर बनाया गया था। उनके नेतृत्व में 18 सदस्यीय मीडिया टीम गठित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। 2026 में भी मीडिया चेयरमैन के रूप में वे पार्टी की महत्वपूर्ण गतिविधियों और कार्यक्रमों की जानकारी मीडिया को देते रहे। जुलाई 2026 में कांग्रेस महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल के उत्तराखंड दौरे की जानकारी भी उन्होंने मीडिया के माध्यम से दी थी।

मुद्दों की राजनीति

महर्षि की राजनीतिक शैली का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि उन्होंने लगातार राज्य और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया है। पलायन को लेकर उन्होंने पहाड़ी जिलों से लगातार हो रहे लोगों के विस्थापन का मुद्दा उठाया। 2022 में उन्होंने राज्य के खाली होते गांवों और पहाड़ों में वन्यजीवों के आतंक को गंभीर समस्या बताया था।अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद भी उन्होंने कानून-व्यवस्था और मामले की जांच को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर भी वे कांग्रेस की ओर से लगातार सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। मई 2026 में नीट पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के पत्र की जानकारी मीडिया को राजीव महर्षि ने ही दी थी। इससे स्पष्ट है कि उनकी भूमिका केवल पार्टी के कार्यक्रमों की जानकारी देने वाले मीडिया प्रभारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे राजनीतिक मुद्दों पर कांग्रेस का मुखर पक्ष रखने वाले नेताओं में भी शामिल रहे हैं।

2024 में मेयर की दौड़ में उतरे

राजीव महर्षि के राजनीतिक सफर में 2024 का नगर निकाय चुनाव एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। उन्होंने देहरादून नगर निगम के मेयर पद के लिए कांग्रेस से टिकट का दावा पेश किया। यह पहली बार था जब वे प्रत्यक्ष चुनावी राजनीति में बड़े पद के लिए सामने आए। उस समय उन्होंने देहरादून को आधुनिक और सुविधायुक्त शहर बनाने की बात कही थी।

उनकी प्राथमिकताओं में ट्रैफिक प्रबंधन, कूड़ा निस्तारण, पार्किंग, पार्क, पेयजल, जल निकासी, स्वच्छता, स्वास्थ्य और नागरिक सुविधाओं का विस्तार शामिल था। हालांकि कांग्रेस ने उन्हें मेयर का टिकट नहीं दिया, लेकिन इस घटनाक्रम ने यह जरूर संकेत दिया कि संगठन और मीडिया की राजनीति से आगे बढ़कर वे प्रत्यक्ष चुनावी राजनीति में भी अपनी भूमिका तलाश रहे हैं।

नई जिम्मेदारी, नई राजनीतिक भूमिका

अगस्त 2026 में कांग्रेस की नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के साथ राजीव महर्षि को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कई वर्षों से वे पार्टी के मीडिया और राजनीतिक संवाद का महत्वपूर्ण चेहरा रहे हैं। अब प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका केवल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी बढ़ेंगी। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की चुनौती के दौर में यह जिम्मेदारी उनके राजनीतिक अनुभव की अगली परीक्षा भी होगी।

देहरादून से प्रदेश की राजनीति तक

राजीव महर्षि की कहानी मूलतः देहरादून की स्थानीय राजनीति से निकलकर प्रदेश कांग्रेस के संगठन तक पहुंचने की कहानी है। छात्र राजनीति से शुरुआत, एनएसयूआई और युवा कांग्रेस में सक्रियता, राज्य आंदोलन में भागीदारी, कांग्रेस संगठन में लगातार सक्रिय भूमिका, वर्षों तक पार्टी के मीडिया चेहरे के रूप में काम और फिर मेयर पद की दावेदारी—इन पड़ावों ने उनकी राजनीतिक पहचान को धीरे-धीरे आकार दिया। अब प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद राजीव महर्षि के सामने चुनौती भी बड़ी है। उन्हें संगठन के भीतर अपनी वर्षों की सक्रियता को व्यापक राजनीतिक भूमिका में बदलना होगा।

देहरादून की राजनीति में राजीव महर्षि की सबसे बड़ी ताकत उनका लंबा संगठनात्मक अनुभव और मीडिया के साथ संवाद की क्षमता है। अब देखना यह होगा कि प्रदेश उपाध्यक्ष के नए दायित्व के साथ वे इस अनुभव को कांग्रेस के व्यापक संगठनात्मक विस्तार और चुनावी राजनीति में किस तरह इस्तेमाल करते हैं।

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