Consulting Editor : Mo Faheem ‘Tanha’
हरिद्वार(Big news today)। शनिवार को सुबह से ही पितृ अमावस्या के अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। जिससे हरकी पैड़ी सहित विभिन्न गंगा घाटों पर स्नान और पितरों के तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने से शहर में यातायात का दबाव बढ़ गया।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते दिल्ली से देहरादून जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुबह से ही लंबा जाम लग गया। इसके कारण स्थानीय लोगों के साथ ही बाहरी राज्यों से हरिद्वार पहुंचे श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लगने से लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी समय लगा।वहीं, पितरों के निमित्त तर्पण और धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए हरिद्वार पहुंच रहे श्रद्धालु भी जाम में फंसे रहे।
पितृ अमावस्या पर श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के चलते शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित रही और लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।पवित्र भागीरथी और अलकनंदा नदी के संगम स्थल देवप्रयाग में सर्व पितृ अमावस्या और पितृ विसर्जन के अवसर पर शनिवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। संगम तट पर अलसुबह से ही लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। जहां श्रद्धालुओं ने संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर स्नान किया और अपने पितरों का विधि-विधान से तर्पण और पिंडदान किया। इस दौरान लोगों ने पूजा-अर्चना कर अपने पूर्वजों को विदाई दी और घाटों पर पितरों के निमित्त भोजन सामग्री अर्पित की। इसके बाद सूर्य को अर्घ्य देकर पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की गई। सर्व पितृ अमावस्या के इस पावन पर्व पर संगम नगरी के घाटों पर धार्मिक अनुष्ठानों और रीति-रिवाजों का दौर चलता रहा।
पितृ विसर्जन के अवसर पर शनिवार को श्रीनगर के अलकनंदा तट स्थित अलकेश्वर घाट, शारदानाथ घाट और आईटीआई घाट पर सुबह से ही लोगो की आवाजाही बनी रही। लोगों ने अलकनंदा नदी में स्नान कर पितरों का तर्पण किया और पूजा-अर्चना के साथ अपने पूर्वजों को विदाई दी।घाटों पर पहुंचे लोगों ने पितरों के निमित्त भोजन सामग्री अर्पित की। इसके साथ ही सूर्य को अर्घ्य देकर पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। सुबह के समय घाटों पर श्राद्ध और तर्पण करने वालों की भीड़ नजर आई। लोगों ने परंपरा के अनुसार अपने पूर्वजों का स्मरण कर धार्मिक रीति-रिवाजों का निर्वहन किया।




