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केंद्र, पीएमवीबीआरवाई से दो वर्षों में 3.5 करोड़ रोजगार सृजन को प्रतिबद्ध!

Uttarakhand


रोजगार सृजन के केंद्र में है, पहाड़ी एवं सीमावर्ती जिलों से पलायन रोकथाम!

देहरादून । केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना से दो वर्षों में 3.5 करोड़ रोजगार सृजन की प्रतिबद्धता जताई है। लगभग 3 लाख करोड़ के बजट परिव्यय से संचालित इस योजना के अंतर्गत ही पहाड़ी और सीमावर्ती जिलों में पलायन रोकथाम में मददगार कोशिशें की जा रही हैं। जिसमें अनुकूल इको-टूरिज्म, बागवानी, हथकरघा, हस्तशिल्प और संबद्ध गतिविधियों को प्रमुख रूप से बढ़ाया जा रहा है।

प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट द्वारा राज्यसभा में पर्वतीय एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में पलायन के सम्बन्ध में पूछे गए सवाल के जवाब यह जानकारी सामने आई है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार
सुश्री शोभा कारान्दलाजे ने बताया कि

केंद्रीय द्वारा1 अगस्त 2025 से विनिर्माण क्षेत्र पर विशेष ध्यान देते हुए रोज़गार सृजन को बढ़ावा देने, रोज़गार क्षमता बढ़ाने और सभी क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए “प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना” यानि पीएमवीबीआरवाई नामक रोज़गार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना शुरू की गई। इस योजना की पंजीकरण अवधि 31 जुलाई 2027 तक दो वर्ष रखी गई है। जिसका बजटीय परिव्यय 299,446 करोड़ है, जिससे 2 वर्षों की अवधि में पूरे देश में 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियों के सृजन को प्रोत्साहित किया जाना है। जिसके तहत सरकार स्थानीय संसाधनों और तुलनात्मक लाभों के अनुरुप ग्रामीण रोजगार, कौशल विकास और स्व-रोजगार कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय रोजगार के अवसरों को मजबूत करते हुए रोजगार सृजन कर रही है।

पहाड़ी और सीमावर्ती जिलों को लेकर उन्होंने बताया कि कौशल प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और उद्यमिता सहायता तक पहुंच बढ़ाकर वहां के युवाओं की रोजगार क्षमता में सुधार किया जा रहा है। इसके साथ ही, पहाड़ी इलाकों के अनुकूल इको-टूरिज्म, बागवानी, हथकरघा, हस्तशिल्प और संबद्ध गतिविधियों जैसी क्षेत्र-विशिष्ट आजीविका को बढ़ावा दे रही है। स्थानीय उद्यमों और दूरस्थ कार्य के अवसरों को समर्थ बनाने के लिए डिजिटल कनेक्टिविटी सहित बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में सुधार कर रही है। क्षेत्र-विशिष्ट विकास अंतरालों को दूर करने के लिए राज्य सरकार की पहलों के साथ केंद्रीय योजनाओं का एकीकृत क्रियान्वयन कर रही है। इन उपायों का उ‌द्देश्य स्थानीय आर्थिक स्थितियों में सुधार करते हुए मजबूरीवश होने वाले प्रवासन को कम करना है, वहीं बेहतर अवसरों की तलाश में व्यक्तियों के प्रवास करने की स्वतंत्रता का सम्मान करना है।

सरकार ने देश भर के युवाओं को सहायता प्रदान करने के लिए विभिन्न कदम भी उठाए हैं, अर्थात् शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में युवाओं सहित सभी की रोजगार क्षमता में सुधार करने के साथ-साथ रोजगार सृजन सरकार की प्राथमिकता है और यह भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों किया जा रहा है। ये मंत्रालय विभिन्न रोजगार सृजन योजनाओं, कार्यक्रमों जैसे प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, विकसित भारत-गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण यानि वीबी-जी आरएएम जी, दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना, ग्रामीण स्व-रोजगार और प्रशिक्षण संस्थान, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम आदि को कार्यान्वित कर रहें हैं जो पूंजीगत व्यय में वृद्धि के साथ-साथ रोजगार सृजन को बढ़ावा देते हैं।

इसके अलावा, श्रम और रोजगार मंत्रालय भारत सरकार, राष्ट्रीय करिअर सेवा (एनसीएस) पोर्टल का संचालन कर रहा है, जो एक डिजिटल प्लेटफॉर्म [www.ncs.gov.in] के माध्यम से निजी और सरकारी क्षेत्रों की नौकरियों, इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन जॉब फेयर (रोजगार मेले) की जानकारी नौकरी की खोज और मिलान, करियर काउंसलिंग (परामर्श), व्यावसायिक मार्गदर्शन, कौशल विकास पाठ्यक्रमों कौशल/प्रशिक्षण कार्यक्रम आदि की जानकारी सहित करिअर से संबंधित सेवाएं प्रदान करने के लिए एक वन स्टॉप सोल्यूशन है।

इसी तरह कामगारों हेतु बेहतर कार्यदशाओं, सुरक्षा, मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और उनके कल्याण को बढ़ाने के लिए चार श्रम संहिताओं अर्थात् मजदूरी संहिता, 2019, औ‌द्योगिक संबंध (आईआर) संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशाएं संहिता, 2020 को दिनांक 21 नवंबर 2025 को लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत, मौजूदा 29 श्रम कानूनों को समाविष्ट किया गया है। इन नई श्रम संहिताओं में, असंगठित गिग, प्लेटफॉर्म और अंतरराज्यीय प्रवासी कामगारों के लिए नियुक्ति पत्र, एकसमान न्यूनतम मजदूरी, राष्ट्रव्यापी सामाजिक सुरक्षा, निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच, रात की पाली सहित सभी क्षेत्रों में काम करने के लिए महिलाओं के अधिकारों का विस्तार आदि अनिवार्य हैं। ये संहिताएं, असंगठित कामगारों सहित सभी क्षेत्रों के कामगारों की सुरक्षा, कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाती हैं।