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विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को दया नहीं, सम्मान और अवसर चाहिए: राज्यपाल

Dehradun


Consulting Editor : Mo Faheem ‘Tanha’
देहरादून 29 सितम्बर(BY NEHA GOYAL)। झाझरा स्थित आईटीआईटीआई दून संस्कृति स्कूल में आयोजित “विशिष्ट अधिगम अक्षमता (डिस्लेक्सिया) एवं ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के मैपिंग अभियान” का शुभारंभ करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को दया नहीं, बल्कि सम्मान, सहयोग और अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि किसी बच्चे की कठिनाई को उसकी कमी नहीं, बल्कि उसकी विशेष आवश्यकता के रूप में समझना होगा। किसी बच्चे की कठिनाई को उसकी पहचान मत बनाइए, उसकी क्षमता को उसकी पहचान बनाइए। उन्होंने समावेशी, संवेदनशील और अवसरों से परिपूर्ण उत्तराखण्ड के निर्माण का आह्वान किया।

राज्यपाल ने कहा कि मैपिंग अभियान का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे की समय पर पहचान कर उसे उचित परामर्श, विशेषज्ञ सहायता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि 21वीं सदी तकनीक की सदी है हम इन तकनीकों के जरिए दिव्यांग बच्चों को सहायता और कई अवसर प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि परिवार, विद्यालय, विशेषज्ञ और प्रशासन के समन्वित प्रयासों से ही विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए मजबूत सहयोग तंत्र विकसित किया जा सकता है। पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक भी समय पर विशेषज्ञ सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना आवश्यक है।

राज्यपाल ने  तरुण विजय के पिछले लगभग 25 वर्षों से देश के हिमालय और नॉर्थ रीजन के जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों के लिए विद्यालय की स्थापना करना सेवा, संवेदना और राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों में दिव्यांग बच्चों के लिए 200 शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। उन्होंने इसे समावेशी शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों की क्षमता पहचानकर उनके विकास को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के मार्गदर्शन में शिक्षा के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय सुधार हुए हैं। पूर्व सांसद एवं डिस्लेक्सिया सोसायटी उत्तराखण्ड के अध्यक्ष  तरुण विजय ने कहा कि प्रदेश में दिव्यांग बच्चों की पहचान, शिक्षा, उपचार और पुनर्वास के क्षेत्र में व्यापक स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है।

उन्होंने अभियान को प्रदेश के प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे तक पहुँचाने का संकल्प व्यक्त किया। कार्यक्रम में एनआईईपीवीडी के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र धालवाल ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, शिक्षण एवं सहयोग से जुड़े महत्वपूर्ण विचार साझा किए। शिवानी कोटनाला ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों के अध्यापक एवं छात्र उपस्थित रहे।

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