Affiliate Disclosure: This article contains affiliate links. As an Amazon Associate we earn from qualifying purchases.

राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस पर दी पद्म विभूषण प्रशांत चंद्र महालनोबिस को श्रद्धांजलि

Dehradun Uttarakhand






 प्रशासनिक आंकड़ों की क्षमता के प्रभावी उपयोग पर दिया गया जोर
देहरादून। 20वें राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर पर सोमवार को जिला अर्थ एवं सांख्याधिकारी कार्यालय, विकास भवन, देहरादून में पद्म विभूषण प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर जिला अर्थ एवं सांख्याधिकारी शशि कांत गिरी ने पद्म विभूषण प्रशांत चंद्र महालनोबिस के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया। इसके उपरांत कार्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला अर्थ एवं सांख्याधिकारी शशि कांत गिरी ने बताया कि इस वर्ष राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस की थीम “प्रशासनिक आंकड़ों की क्षमता को उजागर करना) निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के प्रभावी एवं सुशासित प्रशासन की आधारशिला विश्वसनीय आंकड़ों पर टिकी होती है। जन्म-मृत्यु पंजीकरण, राशन कार्ड, आधार, भूमि अभिलेख, कर भुगतान, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं से प्राप्त प्रशासनिक आंकड़े शासन व्यवस्था का स्वाभाविक उपोत्पाद हैं। इनका वैज्ञानिक प्रबंधन एवं प्रभावी उपयोग नीति निर्माण, संसाधनों के बेहतर नियोजन तथा समावेशी एवं पारदर्शी शासन को सुदृढ़ बना सकता है।


उन्होंने कहा कि प्रशासनिक आंकड़ों के प्रभावी उपयोग में डेटा की गुणवत्ता, विभागों के बीच समन्वय का अभाव, गोपनीयता संबंधी चुनौतियां तथा तकनीकी अवसंरचना की सीमाएं प्रमुख बाधाएं हैं। इन चुनौतियों के समाधान के लिए आंकड़ों का मानकीकरण, अंतर-विभागीय एकीकरण, डेटा संरक्षण से जुड़े सुदृढ़ प्रावधान तथा कुशल मानव संसाधन का विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि Digital India जैसी पहल इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथि अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई, विनय कुमार ने कहा कि पद्म विभूषण प्रशांत चंद्र महालनोबिस का सबसे महत्वपूर्ण योगदान Sample Survey की अवधारणा को विकसित करना था, जिसने आधुनिक सांख्यिकी को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने बताया कि पद्म विभूषण प्रशांत चंद्र महालनोबिस को अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। वर्ष 1945 में वे Royal Society, London के फेलो चुने गए तथा वर्ष 1957 में International Statistical Institute के अध्यक्ष बने। भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1968 में Padma Vibhushan से सम्मानित किया।
अपर सांख्यिकी अधिकारी डॉ. बृजपाल सिंह ने पद्म विभूषण प्रशांत चंद्र महालनोबिस के सांख्यिकी के क्षेत्र में योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने वर्ष 1931 में कोलकाता में भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना की। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उन्हें भारत सरकार के नवगठित मंत्रिमंडल का सांख्यिकी सलाहकार नियुक्त किया गया।


कार्यक्रम में अपर सांख्यिकी अधिकारी उदित कुमार, नवीन कुमार, प्रधान सहायक अब्बल सिंह नेगी, बहादुर सिंह, सरबीन भंडारी, अर्जुन सिंह, दीपिका, सतेंद्र नेगी, मोहित भंडारी, हिमांशु बिष्ट, शकुंतला, संगीता नेगी, विनोद कुमार, अमित कुमार, राजेंद्र सिंह तथा दीवान सिंह चौहान सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
अंत में जिला अर्थ एवं सांख्याधिकारी शशि कांत गिरी ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आह्वान किया कि वे सांख्यिकी के क्षेत्र में गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं नवाचार को बढ़ावा देते हुए उत्कृष्ट कार्य करें तथा राष्ट्रीय विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *