हरिद्वार। हरिद्वार स्थित सप्तऋषि मैदान में आयोजित त्रिदिवसीय “गुरुदेव समाधि मन्दिर–मूर्ति स्थापना महोत्सव” समापन श्रद्धा, दिव्यता एवं भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। यह आयोजन भारत माता मन्दिर के संस्थापक, करुणामूर्ति, भगवद्पादाचार्य आदि शंकराचार्य की परम्परा के दिव्य संवाहक, वैदिक सनातन धर्म संस्कृति के प्रखर प्रसारक पद्मभूषण, निवृत्त-शंकराचार्य, ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज की दिव्य स्मृतियों को चिरस्थायी एवं अक्षुण्ण स्वरूप प्रदान करने हेतु आयोजित किया गया। यह त्रिदिवसीय महोत्सव भारत माता मन्दिर–समन्वय सेवा ट्रस्ट एवं भारत माता जनहित ट्रस्ट के अध्यक्ष, श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य, श्रोत्रिय-ब्रह्मनिष्ठ, अनन्त विभूषित जूनापीठाधीश्वर, आचार्यमहामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज (“पूज्य आचार्य”) के पावन सान्निध्य में सम्पन्न हुआ।
आज के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विशेष उपस्थित रही। विशिष्ट अतिथि के रूप में, उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केन्द्रीय उर्जा तथा आवास एवं शहरी मंत्री मनोहर लाल, कार्ष्णि पीठाधीश्वर अनन्त विभूषित स्वामी गुरूशरणानन्द महाराज, निर्वाणपीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर अनन्त विभूषित स्वामी विशोकानन्द महाराज, रामजन्मभूमि न्यास के कोषाध्यक्ष परम पूज्य स्वामी गोविन्ददेव गिरि महाराज, उत्तराखण्ड विधानसभा की अध्यक्षा ऋतु खंडूरी, उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, उत्तराखण्ड के पूर्व-मुख्यमंत्री एवं पूर्व-केन्द्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, हरिद्वार के सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत की उपस्थिति रही।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोरक्ष पीठाधीश्वर श्रीमहंत योगी आदित्यनाथ ने अपने उद्बोधन में कहा कि पूज्य गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज ने समन्वय, सद्भाव और एकात्मता का दिव्य मंत्र देकर राष्ट्र को एक नई दिशा प्रदान की। उनका संदेश था-सबको साथ लेकर चलना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है। उन्होंने वनवासी और आदिवासी समाज के उत्थान हेतु अनेक कल्याणकारी कार्य किए तथा समाज के वंचित और पीड़ित वर्गों तक पहुँचकर सेवा का आदर्श स्थापित किया। “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को साकार करते हुए उन्होंने गाँव-गाँव जाकर अन्न, अक्षर और औषधि के माध्यम से जनकल्याण का कार्य किया। उनका जीवन त्याग, सेवा और राष्ट्रभक्ति का प्रेरणादायी प्रतीक रहा है।
देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने अपने प्रेरक उद्बोधन ने कहा कि भगवद्पादाचार्य परम्परा के दिव्य संवाहक, भारत माता मन्दिर के संस्थापक, पद्मभूषण से अलंकृत, करुणामूर्ति ब्रह्मलीन परमपूज्य स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज ने अपना सम्पूर्ण जीवन सनातन संस्कृति, राष्ट्रचेतना और मानवता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने आध्यात्मिक साधना को समाज सेवा से जोड़कर एक ऐसा जीवन-दर्शन दिया, जिसने असंख्य लोगों को सेवा, त्याग और करुणा के मार्ग पर अग्रसर किया। उनका तपस्वी जीवन और दिव्य चिन्तन सदैव समाज के लिए प्रेरणा का अमूल्य स्रोत बना रहेगा। जूनापीठाधीश्वर, आचार्यमहामण्डलेश्वर परम पूज्य स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनके कार्य लोक-कल्याणकारी एवं राष्ट्रहित में सभी को सदैव प्रेरणा देते रहेंगे।
आज के समापन समारोह में, समन्वय सेवा न्यास, भारत माता मन्दिर द्वारा मानवता की निःस्वार्थ सेवा, जनजातीय एवं वनवासी क्षेत्रों में चिकित्सा सेवा के विस्तार तथा लोकमंगल की भावना से प्रेरित उल्लेखनीय योगदान के लिए आदरणीय डॉ. अनुज सिंघल, सचिव, विवेकानन्द हेल्थ मिशन सोसायटी, उत्तराखण्ड तथा आदरणीया डॉ. तारा सिंघल, कार्यकारी निदेशक, स्वामी विवेकानन्द धर्मार्थ चिकित्सालय, धर्मावाला को संयुक्त रूप से “समन्वय पुरस्कार” से अलंकृत किया गया।
उल्लेखनीय है कि यह “समन्वय पुरस्कार” सम्मान श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय-ब्रह्मनिष्ठ अनन्त विभूषित निवृत्त-शंकराचार्य, पद्मविभूषित परमगुरूदेव ब्रह्मलीन पूज्यपाद स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज की दिव्य प्रेरणा के पावन अनुक्रम में तथा वर्तमान में, आचार्य महामण्डलेश्वर अनन्त विभूषित पूज्यपाद स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित “गुरुदेव समाधि मन्दिर – मूर्ति स्थापना समारोह” में अतिविशिष्ट अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया।
इस समारोह में, महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी अखिलेश्वरानन्द गिरि महाराज, महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी ललितानन्द गिरि जी महाराज, पूज्य महंत देवानन्द महाराज, महामण्डलेश्वर पूजनीया स्वामी नैसर्गिका गिरि, भारत माता मन्दिर-समन्वय सेवा ट्रस्ट के सचिव आई.डी. शास्त्री , पूज्य सन्तवृंद, संस्था के वरिष्ठ न्यासीगण, शासन-प्रशासन के अधिकारीगण एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


