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युवा वैज्ञानिक ‘रोबिन नील’ का जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने किया सम्मान, नील के माईक्रोबायोलॉजी आधारित हैलमेट अविष्कार की डीएम ने की प्रशंसा

Uttar Pradesh


नजीबाबाद/बिजनौर (Report: Ahsan ‘Guddu’)

जिलाधिकारी उमेश मिश्रा द्वारा आज कलेक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय कक्ष में नजीबाबाद के मोहल्ला ज़ाब्तागंज निवासी युवा वैज्ञानिक और अंबेडकर इनोवेशन फाउंडेशन की ओर से दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में डेढ़ लाख रुपए, रजत पदक तथा प्रशस्ति पत्र प्राप्त रोबिन नील का स्वागत करते हुए उनके अविष्कारों पर अपनी हार्दिक शुभकामनाएं प्रदान की और उनके उज्जवल भविष्य की कामना भी की।
इस अवसर पर युवा वैज्ञानिक रॉबिन नील ने जिलाधिकारी उमेश मिश्रा को जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने माइक्रोबायोलॉजी से स्नातक की परीक्षा पास की है। उन्होंने बताया कि उनकी शुरू से ही विज्ञान के क्षेत्र में नई खोज एवं अनुसंधान में उनकी रुचि रही है। इसी लगन के चलते उन्होंने एक ऐसा हेलमेट आविष्कार किया है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर में कमी आ सकेगी। उन्होंने कहा कि इस हेलमेट के इलेक्ट्रॉनिक यंत्र को बाइक में एक डिवाइस लगाकर अटैच किया जाता है और डिवाइस बाइक से अटैच होने के बाद जब तक हेलमेट नहीं पहनेंगे स्टार्ट नहीं होगी। इसी के साथ ही अत्यधिक नशे में युक्त व्यक्ति भी अपनी बाइक को स्टार्ट करने में असमर्थ होगा, जिसके कारण सड़क दुर्घटना की कोई संभावना नहीं रहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि इसके अलावा यह डिवाइस बाइक चोरी रोकने में भी सहायक सिद्ध होगी।

Photo: डीएम श्री उमेश मिश्रा एवं युवा वैज्ञानिक रोबिन नील

रोबिन नील ने अपने अविष्कार ध्वनि तरंगों से बिजली उत्पादन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने ध्वनि तरंगों से विद्युत उत्पन्न करने वाली डिवाइस तैयार की है, जिसका उन्होंने एक अस्पताल में सफल प्रदर्शन भी किया। उन्होंने बताया कि साउंड कैचर से धमनी की हाई-फ्रिकवेंसी के जरिए रिले द्वारा डिवाइस को सिग्नल प्राप्त होता है। उनका कहना है कि साउंड कैचर लो फ्रिकवेंसी को 12 हर्ट्स से 50 हर्ट्स तक करने की क्षमता उक्त डिवाइस में पाई जाती है, जिसको और अधिक बढ़ाया भी जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रैफिक सिग्नल और फ्लाईओवर पर पथ प्रकाश से जुड़ी लाइटों को बिजली उत्पादन कराने में डिवाइस सहायक साबित होगी। इसके अलावा उन्होंने मिल से निकलने वाली राख को भी इंधन के विकल्प के रूप में परिवर्तित करने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि नोएडा की डेंसो इंडिया लैब में काली राख को ईंधन के रूप में परिवर्तन कर उसे वैकल्पिक ऊर्जा का स्रोत विकसित करने का प्रोजेक्ट तैयार किया है। उन्होंने कहा कि चीनी मिल से निकलने वाली राख पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह होती है, परंतु इस राख को केमिकल की मदद से ठोस पदार्थ में बदल कर एनर्जी के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।