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जानिए कौन है राष्ट्रीय खेलों का शुभंकर ‘मौली’, क्यों बना हर दिल का चहेता ?

Dehradun Delhi Mussoorie Uttarakhand


BIG NEWS TODAY : देहरादून। उत्तराखंड में आयोजित राष्ट्रीय खेलों का शुभंकर मौली का राज्य के हर जनपद में भव्य स्वागत हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खेल के दौरान मौली की सक्रियता ने सबका दिल जीतने का कार्य किया।

मोनाल पक्षी के बारे में लोग कम ही जानते थे, अधिकांश लोगों ने तो मोनाल के बारे में कभी ज्यादा सुना भी नहीं था लेकिन उत्तराखंड के राज्य पक्षी मोनाल को 38वें राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से देशभर में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी एक नई पहचान मिली है। क्योंकि राष्ट्रीय खेलों को भारत के अलावा विदेशों में भी देखा गया है। राष्ट्रीय खेलों में शुभंकर मौली राज्य पक्षी मोनाल से ही प्रेरित होकर बनाया गया था।

38वें राष्ट्रीय खेल में लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा शुभंकर ‘मौली’ राष्ट्रीय खेलों के समापन के बाद सीएम आवास पहुंचा। मुख्यमंत्री ने सीएम आवास में मौली का स्वागत किया। राष्ट्रीय खेलों का शुभंकर प्रतीक ’मौली’ (मोनाल पक्षी) देशभर में चर्चा का केंद्र रहा है। खेलों के आयोजन के दौरान मौली बनकर रहने वाले वॉलिंटियर्स को मुख्यमंत्री ने सराहना करते हुए बधाई दी। 

उत्तराखण्ड का राज्य पक्षी मोनाल की विशिष्टता से देशभर के लोग परिचित हुए। 38वें राष्ट्रीय खेल ने उत्तराखंड को देवभूमि और वीर भूमि के साथ ही खेल भूमि के रूप में नई पहचान दिलाई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास और नई खेल नीति के परिणाम स्वरूप राज्य के खिलाड़ियों द्वारा 38वें राष्ट्रीय खेलों में शानदार प्रदर्शन कर 103 पदक हासिल कर देशभर में शीर्ष सात राज्यों की श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है। 37वें राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखण्ड 25वें स्थान पर था। उत्तराखण्ड में हुए 38वें राष्ट्रीय खेल ग्रीन गेम्स, ई-वेस्ट से बनाये गये मेडल और पदक विजेता खिलाड़ियों के नाम से पौध रोपण के लिए भी याद किया जायेगा।

राज्य पक्षी मोनाल वन्यजीव अधिनियम के तहत है संरक्षित- उत्तराखंड में मोनाल पक्षी वर्तमान में पेड़ों की रेखा से ऊपर घास वाली ढलानों में पाए जाते हैं। ये मुख्य रूप से चमोली जनपद के ऊपरी क्षेत्रों, चोपता, मुनस्यारी, केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य, पिंडारी और उत्तरकाशी के डोडीताल क्षेत्र में मोनाल पाए जाते हैं । “हिमालयी मोनाल को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची एक के तहत रखा गया है। पतझड़ के मौसम में प्रायः यह कीड़े और इल्लियाँ खाते हैं जो इनको सड़ी पत्तियों के नीचे मिल जाती हैं। अन्य समय यह जड़ें, पत्तियाँ, झाड़ियों और घास की कोपलें, शाहबलूत के फल, बीज, बैरी इत्यादि खाते हैं। राष्ट्रीय खेलों के शुभंकर बनाने की प्रक्रिया के दौरान राज्य पक्षी मोनाल से प्रेरित होकर शुभंकर बनाने का निर्णय लिया गया।