उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में अहम विधेयकों व निर्णयों को मंजूरी,
मदरसा शिक्षा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान अधिनियम 2025 आएगा अस्तित्व में,
अन्य अल्पसंख्यक समुदाओं के शैक्षिक संस्थानों को भी मिलेगी मान्यता
देहरादून, 17 अगस्त 2025: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज सचिवालय में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने चार अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी। ये प्रस्ताव आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत किए जाएंगे।
कैबिनेट ने जिन प्रमुख विधेयकों और निर्णयों को मंजूरी दी, वे निम्नलिखित हैं:
1.समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक 2025
2.उत्तराखंड साक्षी संरक्षण (निरसन) विधेयक 2025
3.उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान विधेयक 2025
4.उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड को निरस्त करने का निर्णय
1. समान नागरिक संहिता (संशोधन) विधेयक 2025
इस विधेयक के माध्यम से मौलिक संहिता में उत्पन्न व्यावहारिक कठिनाइयों और लिपिकीय त्रुटियों को दूर किया जाएगा। इसके अंतर्गत विवाह पंजीकरण की समय-सीमा 6 माह से बढ़ाकर 1 वर्ष की जा रही है। पूर्व में जारी अध्यादेश को अब विधेयक के रूप में प्रतिस्थापित किया जाएगा।
यह संशोधन समान नागरिक संहिता समिति की संस्तुतियों पर आधारित है।
2. उत्तराखंड साक्षी संरक्षण (निरसन) विधेयक 2025
देश में भारतीय न्याय संहिता, 2023 लागू होने के बाद, उत्तराखंड साक्षी संरक्षण अधिनियम, 2020 अप्रासंगिक हो गया है। इसके स्थान पर अब राज्य सरकार द्वारा उत्तराखंड साक्षी संरक्षण योजना, 2025 लागू की जाएगी।
इसके लिए पुराना अधिनियम निरस्त कर एक नया कानूनी ढांचा प्रस्तुत किया जा रहा है जो भारतीय न्याय संहिता की धारा 398 के अनुरूप होगा।
3. अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025
राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों की शैक्षिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह नया विधेयक लाने का निर्णय लिया है। इसके तहत एक प्राधिकरण का गठन होगा जो अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता देने, उनके संचालन की निगरानी रखने और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का कार्य करेगा।
इस विधेयक से मुस्लिम, सिख, जैन, ईसाई और पारसी समुदायों के शैक्षिक संस्थानों को लाभ मिलेगा। मान्यता के लिए निर्धारित शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर, उचित सुनवाई के बाद, मान्यता रद्द भी की जा सकेगी।
4. उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड को किया जाएगा निरस्त
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा गठित उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड को निरस्त करने का निर्णय भी आज की कैबिनेट बैठक में लिया गया। राज्य सरकार का कहना है कि यह निर्णय शैक्षिक पारदर्शिता, समान अवसर और अल्पसंख्यकों के व्यापक हित में लिया गया है।
इस निर्णय के बाद धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों—सिख, ईसाई, जैन, पारसी व मुस्लिम—के शिक्षण संस्थानों के लिए एक प्राधिकरण की स्थापना होगी, जिससे उन्हें समान अधिकार व नियंत्रण के तहत लाया जा सकेगा।
सरकार का यह भी कहना है कि इससे विभिन्न प्रकार के धार्मिक शिक्षा संस्थानों में शैक्षिक गुणवत्ता, प्रशासनिक पारदर्शिता, और वित्तीय उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जा सकेगा।
मदरसा शिक्षा बोर्ड (2016) और संबंधित नियम (2019) का निष्प्रभाव 1 जुलाई, 2026 से
– उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2016 और उत्तराखंड गैर‑सरकारी अरबी एवं फारसी मदरसा मान्यता विनियमावली, 2019 को 1 जुलाई, 2026 से समाप्त माना जाएगा। इस तिथि से ये दोनों कानूनी ढांचे लागू नहीं रहेंगे।
– उसके पश्चात, मदरसा शिक्षा बोर्ड द्वारा अब मान्यता की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और इसका स्थान उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण लेगा। इस प्राधिकरण से संबंधित संस्थानों को पुनः मान्यता प्राप्त करनी होगी, खासकर शैक्षणिक सत्र 2026‑27 से।
पुष्कर धामी सरकार का बड़ा कदम
पुष्कर धामी सरकार द्वारा लिया गया यह चार सूत्रीय निर्णय राज्य में कानूनी, शैक्षिक और प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विधानसभा में इन प्रस्तावों पर बहस और मतदान के बाद इन्हें विधायी रूप मिलने की संभावना है।


