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उत्तराखंड जल निगम के प्रभारी कुमाऊं चीफ निलंबित, पत्नि की फर्म के खाते में ठेकेदार से डलवाए 10 लाख

Dehradun Delhi Mussoorie Uttarakhand


📰 भ्रष्टाचार पर सरकार की सख्ती: मुख्यमंत्री के निर्देश पर उत्तराखंड पेयजल निगम के अधीक्षण अभियंता (प्रभारी, मुख्य अभियंता कुमाऊं) निलंबित, ठेकेदार की फर्म रजिस्टर्ड करके काम देने के एवज में पैसे लेने का आरोप।

देहरादून/हल्द्वानी | BIG NEWS TODAY :
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य में “भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस” की नीति को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देशों के तहत, उत्तराखंड पेयजल निगम हल्द्वानी के अधीक्षण अभियंता सुजीत कुमार विकास को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सुजीत कुमार वर्तमान में प्रभारी मुख्य अभियंता (कुमाऊं) के पद पर कार्य कर रहे थे। यह कार्रवाई कर्मचारी आचरण नियमावली के उल्लंघन के गंभीर आरोपों के चलते की गई है।

📌 शिकायतकर्ता से कथित रूप से पत्नी की फर्म के खाते में लिए ₹10 लाख,

उत्तराखंड पेयजल निगम के अध्यक्ष शैलष बगोली द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि संजय कुमार, जो कि विभिन्न जल योजनाओं में पेटी-ठेकेदार के रूप में कार्यरत हैं, ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वर्ष 2022 में अधीक्षण अभियंता सुजीत कुमार ने, (उस समय देहरादून में पोस्टिंग पर रहते हुए) उनसे उनकी फर्म हर्ष इंटरप्राइजेज को विभाग में पंजीकृत कराने एवं काम दिलाने का आश्वासन दिया था।

इसके एवज में संजय कुमार ने ₹10 लाख की रकम पाँच किस्तों में 6 से 8 जुलाई 2022 के बीच ट्रांसफर की। यह राशि कुचु-पुचु इंटरप्राइजेज नामक फर्म के खाते में भेजी गई, जिसकी साझेदार (पार्टनर) स्वयं अभियंता सुजीत कुमार की पत्नी रंजु कुमारी हैं।

⚖️ जवाब नहीं देने पर हुई निलंबन की कार्रवाई

सुजीत कुमार विकास को 15 दिनों में स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया गया था, लेकिन निर्धारित समय तक कोई उत्तर नहीं दिया गया, जिससे आरोपों की गंभीरता और पुष्टि की संभावना और बढ़ गई। जांच में यह भी पाया गया कि उनके व्यवहार से विभागीय पारदर्शिता और अन्य कर्मियों के कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

🔍 कदाचार की श्रेणी में माना गया कृत्य

कार्यालय आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अभियंता द्वारा किया गया यह कार्य न केवल “उत्तराखंड पेयजल निगम कर्मचारी आचरण विनियमावली” का उल्लंघन है, बल्कि नैतिक और वित्तीय भ्रष्टाचार की श्रेणी में भी आता है।

निगम ने इसे गंभीर सेवा दोष मानते हुए, उत्तराखण्ड पेयजल निगम कार्मिक (अनुशासन एवं अपील) विनियमावली के अंतर्गत कार्रवाई की है।

🏢 कहाँ रहेंगे सम्बद्ध?

निलंबन की अवधि में श्री सुजीत कुमार विकास को महाप्रबंधक (प्रशिक्षण), मानव संसाधन प्रकोष्ठ, उत्तराखण्ड पेयजल निगम, रुड़की कार्यालय से सम्बद्ध रखा गया है।

🗣️ मुख्यमंत्री की नीति का असर

राज्य सरकार द्वारा “भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन” की दिशा में लगातार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा दायित्वों के निर्वहन में कदाचार पाया जाता है, तो उस पर त्वरित और कठोर कार्रवाई की जाए

यह ताज़ा निलंबन उसी नीति का उदाहरण माना जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए की जा रही ऐसी कार्रवाइयों से यह संदेश स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई में सरकार सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।