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30 घंटे की रंगमंच एवं नाटक कार्यशाला में निखारा कौशल

Dehradun Uttarakhand






BIG NEWS TODAY

देहरादूनI डी.ए.वी. (पी.जी.) कॉलेज, देहरादून द्वारा आयोजित 30 घंटे की रंगमंच एवं नाटक कार्यशाला स्पॉटलाइट ऑन यू का सफल समापन हुआ। यह कार्यशाला नाट्य संस्था कलामंच’ के साथ डी.ए. वी. (पी.जी.) कॉलेज के एम.ओ.यू. के तहत आयोजित की गई।

कार्यशाला की संयोजिका डॉ. झरना बैनर्जी के बताया कि कोर्स का उद्देश्य विद्यार्थियों के अन्दर छुपे कौशल और योग्यता को सामने लाना था। प्रतियोगियों में अभिनय, अभिव्यक्ति, मंच संचालन तथा नाट्य कला के प्रति रुचि विकसित करना था।

इस क्रम में मनोरमा नेगी, टी. के. अग्रवाल, कमल पाठक, संजय गुप्ता, वर्षा ठाकुर, वैभव तिवारी, आदीप शर्मा, प्रो. सविता रावत, डॉ. हरि ओम शंकर ने कार्यशाला में अपने-अपने क्षेत्र विशेष पर सत्र लिये।

जहाँ मनोरमा नेगी ने ड्रामा में नृत्य के महत्व को बताया वहीं संजय गुप्ता ने नित्य-प्रतिदिन की जिन्दगी में ड्रामा व नित्य समाज की गतिविधियों की बारीकी से निरीक्षण को ड्रामा का मूल मंत्र बताया।

टी. के. अग्रवाल ने मंच प्रकाशन पर विशेष सत्र लिये। मंच प्रकाशन के लिए प्रयुक्त विभिन्न उपकरणों व उनके प्रयोग के बारे में विस्तार से बताया। कमल पाठक जी ने सिनेमा व टी.वी. सिरियल में ड्रामा के महत्व पर प्रकाश डाला।

वर्षा ठाकुर, वैभव व आदीप ने रस व भाव के कंसेप्ट के साथ-साथ सहज अभिनय को सिखाया।

कार्यशाला में सभी अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा अभिनय की विभिन्न विधाओं संवाद अदायगी, शारीरिक भाषा, मंच सज्जा, आवाज के उतार-चढ़ाव तथा प्रदशन पर प्रशिक्षण दिया गया।

प्रो. सविता रावत ने शिक्षा में आर्ट व ड्रामें के महत्त्व को समझाया। डॉ. हरि ओम शंकन ने भनतमुनि नाट्यशास्त्र रस व हिन्दी ड्रामा के महत्व को बताया।

डॉ. झरना बनर्जी ने बताया कि किस तरह विद्यार्थी ड्रामा को अपने कैरियर के रूप में चुन सकते हैं। साथ ही योग, संगीत व ड्रामा के बीच सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध पर प्रकाश डाला। सत्र पूरे होने पर विद्यार्थियों ने एक वस्तुनिष्ठ परीक्षा दी। साथ ही प्रयोगात्मक सत्र के लिए भी उन्हें अंक दिये गये।

इस कोर्स की सफलता व समापन पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर कुँवर कौशल कुमार ने बधाई दी और बताया कि आज के कॉम्पीटीशन के दौर में विद्याङ्क्षियों को बहुमुखी प्रतिभा का धनी होना पड़ेगा। वर्तमान में रंगमंच में बहुत संभावनाएँ हैं। नाटक इंसान को आत्म अनुशासन व आत्म विश्वास से भर देता है जो कि उसके व्यक्तित्व के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस कार्यक्रम में डॉ. रश्मि त्यागी, डॉ. सविता चौनियाल, प्रो. सविता रावत, डॉ. अनुप मिश्रा, डॉ. झरना बैनर्जी एवं डॉ. हरि ओम शंकर उपस्थित थे।

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