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विशेष: आधी सदी गुजर गई जब सहारनपुर ने दिल्ली को फतह किया था, सहारनपुर के जुनूनी युवा ने दिखा दिया था कि दृढ़ इच्छाशक्ति एवं सकारात्मक सोच से लक्ष्य प्राप्ति सम्भव है!

Uttarakhand


फ़ाइल फोटो : तब और अब पद्मश्री गुरु भारत भूषण जी

सहारनपुर (Big News Today)

आधी सदी होने को आई है, 49 बरस पहले सहारनपुर का एक लड़का 8 मई 1973 को दिल्ली में हुई बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता में पहली बार में ही “दिल्लीश्री” और “मांसपेशी श्री” दोनो खिताब जीतकर लौटा और हंगामा मचा गया! वह यहीं नहीं रुका बल्कि उन्होंने इन खिताबों पर अगले साल भी कब्जा बरकरार रखा व इसके बाद हिमाचलश्री, प्रतापश्री ऑफ इंडिया व अर्जुनश्री के साथ राष्ट्रीय विजेता बनते हुए ऐसे पहले शाकाहारी बॉडी बिल्डर बन गया जिसका जिक्र मॉन्ट्रियल से प्रकाशित अंतर्राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग फेडरेशन के मुखपत्र मसल बिल्डर में तत्कालीन मिस्टर यूनिवर्स रॉबी रॉबिंसन और मिस्टर अमेरिका रॉजर कैलार्ड के साथ हुआ। यह लड़का था आज का विश्वविख्यात योग गुरु स्वामी भारत भूषण जिनके कारण योगियों को भी पद्म पुरस्कार मिलने शुरू हुए और 1991 में उन्हें पहला पद्मश्री सम्मान दिया गया।

जरा विचारें वो वक्त जब सहारनपुर में कोई आधुनिक जिम नहीं होता था, उस जमाने मे अपनी धुन के धनी यहां के एक योगाभ्यासी लड़के ने बॉडी बिल्डिंग में हाथ आजमाने की सोची, और पिल पड़ा योगाभ्यास व अपने देसी जुगाड से शरीर को गढ़ने में! कमाल की बात ये रही कि उसने अपने प्रयोगों और अनुभवों को अपने तक सीमित नहीं रखा बल्कि अपनी कल्पना को आकार देते हुए अपने निजी सीमित साधनों से मोक्षायतन नाम से पहला आधुनिक जिम व योग केंद्र सहारनपुर को दिया। उनका ये प्रयास सहारनपुर के युवाओं के लिए पहले जिम के साथ देश में परंपरागत योग और आधुनिक जिम के एकसाथ होने की पहली मिसाल बन गया। इसी साल में मोक्षायतन योग संस्थान की स्थापना करके खुद को आगे बढ़ाने के साथ-साथ यहां से अनेक चैंपियंस भी देश को दिए। उन्होंने आधुनिक जिम्स की बॉडी बिल्डिंग और क्लब की परिभाषा को बदल कर इन्हे सिर्फ शरीर के बजाय व्यक्तित्व निर्माण केंद्र का रूप दिया। योगी भारत भूषण ने अपने शिष्यों से ये मिसाल कायम की कि उनके शिष्य जितना शरीर को सुडौल बनाने में जितना आगे रहे उतना ही बौद्धिक विकास में भी।

तन मन शिल्पी गुरु पद्मभूषण भारत भूषण जी कहना है कि मैं तो योग और बॉडी बिल्डिंग पर सिर्फ अपने प्रयोग करने में लगा था। पूज्य पिताजी ने एक दिन एक खबर पर टिक लगा कर अखबार मुझे ये कहकर थमा दिया कि ये तेरे काम का है क्या? ये खबर 8 मई को दिल्लीश्री प्रतियोगिता होने की थी। बस मैं वहां चला गया और हंगामा हो गया!

(४९ साल पहले आज के ही दिन दिल्लीश्री व मांसपेशी श्री प्रतियोगिता के दिन के चैंपियन और वर्तमान में गुरुजी भारत भूषण जी के कुछ दुर्लभ फोटो)