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फर्जी शैक्षिक प्रमाण-पत्रों के आरोपों से घिरे विधानसभा में प्रोटोकॉल अधिकारी मयंक सिंघल के खिलाफ उत्तराखंड क्रांति दल ने भी खोला मोर्चा

Dehradun Delhi Mussoorie Uttarakhand


BIG NEWS TODAY : (देहरादून)। विधानसभा में अपनी नियुक्ति फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर पाने के आरोपों का सामना कर रहे प्रोटोकॉल अफसर मयंक सिंघल अब उत्तराखंड के निशाने पर भी आ गए हैं। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ राजेंद्र सिंह बिष्ट ने विधानसभा में प्रोटोकॉल अधिकारी मयंक सिंघल की नियुक्ति को लेकर हमला बोला है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष रीतू खंडूड़ी की ओर से कराई जा रही जांच को भी महज खानापूर्ति करार देते हुए आरोप लगाया कि मयंक सिंघल ने फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों के आधार पर सरकारी पद हासिल किया।

राजेंद्र सिंह बिष्ट ने प्रमाणों का हवाला देते हुए बताया कि मयंक सिंघल की नियुक्ति 27 जुलाई 2006 को तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष यशपाल आर्य और विधानसभा सचिव द्वारा की गई थी। यह नियुक्ति एक तदर्थ पद पर इस शर्त पर की गई थी कि उपयुक्त अभ्यर्थी लोक सेवा आयोग से उपलब्ध होने पर उन्हें हटा दिया जाएगा।

गौरतलब है कि इस मामले में कुछ दिन पहले, बेरोजगार महासंघ के राम कंडवाल ने विधानसभा में प्रोटोकॉल अधिकारी मयंक सिंघल पर हाईस्कूल और इंटर के फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने का आरोप लगाया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला संज्ञान में आने के बाद इसकी संजीदगी को देखते हुए स्पीकर ऋतु भूषण खंडूरी ने इस मामले की जांच के निर्देश विधानसभा सचिव हेम पंत को दिए थे। प्रोटोकॉल अधिकारी मयंक सिंघल ने बिग न्यूज टुडे को बताया कि जब जांच समिति उनको तलब करेगी तो वे पूरा सहयोग करते हुए अपना पक्ष रखेंगे। और जांच में पूरा सहयोग करेंगे। आरोपों को लेकर अभी मीडिया में कुछ बोलने से उन्होने मना कर दिया।

उत्तराखंड क्रांति दल के राजेंद्र सिंह बिष्ट ने आरोप लगाया कि न सिर्फ लोक सेवा आयोग की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई बल्कि विधानसभा जैसे संवैधानिक संस्थान में भाई-भतीजावाद को खुला समर्थन मिला। उन्होने कहा कि मयंक सिंघल को 15 दिन के भीतर शैक्षिक दस्तावेजों की वैधता प्रस्तुत करनी थी, लेकिन आज तक उनकी प्रमाणिकता की निष्पक्ष जांच नहीं हो सकी।

नहीं हुई प्राईवेट परीक्षा आयोजितः राजेंद्र सिंह बिष्ट ने दावा किया कि जिस शिक्षा संस्थान से मयंक सिंघल ने हाई स्कूल और इंटर की परीक्षाएं पास कीं, उस संस्थान ने कभी भी प्राइवेट परीक्षा आयोजित ही नहीं की। यह अपने आप में स्पष्ट संकेत है कि उनके दस्तावेज फर्जी हैं।

उक्रांद ने की विधानसभा अध्यक्ष से मांगः उत्तराखंड क्रांति दल ने स्पीकर से मांग की है कि 15 दिनों के भीतर एक निष्पक्ष जांच समिति गठित कर जांच कराई जाए और तब तक मयंक सिंघल को निलंबित किया जाए। साथ ही अब तक विधानसभा में नियुक्त सभी तदर्थ और विचलन से लगे कर्मचारियों के शैक्षिक दस्तावेजों की भी जांच कराई जाए।