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जल संस्थान के नए मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह के सामने हैं विभागीय ढांचे सहित फील्ड की कई चुनौतियां…

Dehradun Delhi Mussoorie Uttarakhand


BIG NEWS TODAY : उत्तराखंड जल संस्थान के नए सीजीएम यानि मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह ने चार्ज संभाल लिया है। निवर्तमान सीजीएम निलिमा गर्ग 31 मई को सेवानिवृत हो गई हैं, उनको शनिवार की शाम को जल संस्थान के मुख्यालय परिसर में विभागीय स्तर पर एक सम्मान समारोह आयोजित करके विदाई दी गई है। नए सीजीएम डीके सिंह मुख्यालय में जीएम के पद कार्य कर रहे थे अब सीनियर मोस्ट होने के नाते उनको सीजीएम का चार्ज दिया गया है यानि वे अब उत्तराखंड जल संस्थान के सर्वेसर्वा बन गए हैं।

कई चुनौतियां हैं नए सीजीएम के सामनेः

नए मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह के सामने जल संस्थान के कामकाज को लेकर कई चुनौतियां हैं। वे जल संस्थान के अबतक के एकमात्र ऐसे अधिकारी हैं जो अब मुख्य महाप्रबंधक होने के साथ-साथ पूरे प्रदेश के महाप्रबंधकों का चार्ज भी संभाल रहे हैं। सीजीएम होने के साथ-साथ उनके पास महाप्रबंधक (मुख्यालय), महाप्रबंधक (टीआरएम), महाप्रबंधक (पौड़ी गढ़वाल), महाप्रबंधक (पिथौरागढ़) एवं महाप्रबंधक ( नैनीताल) का चार्ज भी है। क्योंकि इन सभी परिक्षेत्रों में जल संस्थान के अधिकारियों की लंबे समय डीपीसी ना होने के कारण इन सभी जीएम का चार्ज पिछले कुछ समय से डीके सिंह के पास ही चल रहा है।ॉ

सबसे बड़ी चुनौती नए सीजीएम डीके सिंह के सामने यही होगी कि विभागीय ढांचे को ठीके से फंक्शन में लाने के लिए अपने हाथों को कैसे मजबूत किया जाए, यानि इन सभी महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति हो, इसके रास्ते तलाशे जाने बेहद जरुरी हैं, क्योंकि अधिशासी अभियंता से अधीक्षण अभियंता के पदों पर ही अहर्यता के आधार पर प्रमोशन लंबित हैं, और अधीक्षण अभियंताओं में से ही फिर महाप्रबंधक पद पर प्रमोशन या फिर चार्ज देने की व्यवस्था की जाएगी।

इसके साथ ही प्रदेश में पानी की योजनाओँ को समय से पूरा करने, ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने, सहित भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई योजनाएं बनाना भी अहम होगा।

ये हैं प्राथमिकताएँः
चार्ज संभालने के बाद अपनी प्राथमिकताएं गिनाते हुए नए सीजीएम डीके सिंह ने कहा कि उनकी कुछ अहम प्राथमिकताएँ हैं जिनपर वे फोकस करते हुए आगे बढ़ेंगे।
  1. विभागीय अधिकारी ढांचे को दुरुस्त करते हुए विभिन्न खाली पदों पर अधिकारियों के प्रमोशन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। जहां कोई तकनीकि अड़चन है उसको नियमानुसार कैसे ठीक किया जाए उसपर काम करके अगले महीने तक पदों पर नियुक्ति की कोशिश की जाएगी।
  2. प्रदेश के सभी क्षेत्रों , विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल के संकट को कम करना प्राथमिकता रहेगी, क्योंकि संकटों का सामना आम जनता को करना पड़ता है, ये स्थिति ठीक नहीं है। दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्रतिदिन की जरुरत का एक बार जरुर पानी मिल जाए लोगों को। कई-कई दिन में पानी मिलने की शिकायतों को समाप्त करना है।
  3. पर्यटन उत्तराखंड में बेहतरीन तरीके से बढ़े, जहां पर्यटन क्षेत्र विकसित हो रहे हैं वहां पानी योजना विकसित करनी हैं, वर्तमान में जो दूरस्थ स्थानों में पानी की स्थिति है गांव वालों के लिए जो नौला धौरा से पानी ढो रहे हैं।
  4. देहरादून एवं हल्द्वानी जैसे शहरों में वाटर टेबल नीचे जा रहा है, इसको स्टेबिलिटी प्रदान करना , इनको रेनवाटर हार्वेस्टिंग के जरिए प्रोटेक्ट करना, यदि हम सौ मिलियन पानी निकाल रहे हैं तो दो सो मीलियन रिचार्ज करें, ये व्यस्था करनी है।
  5. हमारे एसटीपी यानी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए पानी शोधित करने के बाद पानी को खाने-पीने-नहाने, कपड़े-बर्तन धोने के अलावा अन्य कामों में इस्तेमाल करेंगे, जैसे गाड़ियां धोने, मकान बनाने, बागीचों में पेड़ों को पानी देने जैसे कार्यों में इस्तेमाल किया जाए सके। एसटीपी से शोधित पानी की स्वीकार्यता और उपयोगिता बढ़ाने के लिए अभियान चलाएँगे, इसको सबसे पहले सरकारी भवनों में शुरुआत करेंगे।