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नई दिल्ली में मनाया गया उत्तराखंड महोत्सवः जौनसार बावर की लोक संस्कृति और व्यंजनों ने बिखेरा रंग

Dehradun Delhi Uttarakhand


नई दिल्ली/देहरादून: BIG NEWS TODAY : नई दिल्ली के रायसीना हिल स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित उत्तराखंड महोत्सव के दौरान जौनसार बावर जनजाति कल्याण समिति, दिल्ली ने जौनसारी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। इस भव्य आयोजन में उत्तराखंड के तीनों अंचलों गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार बावर से आए कलाकारों और स्थानीय प्रवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

लोक संस्कृति और खानपान की झलक:- महोत्सव में जौनसार बावर के कलाकारों ने हारुल और तांदी जैसे पारंपरिक लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी। इसके अलावा, जौनसार बावर के विशेष व्यंजनों, जैसे सिडकू और मशयाड़ा भात ने दर्शकों का मन मोह लिया। आयोजन के दौरान सिडकू की इतनी मांग रही कि इसकी कमी हो गई। समिति के चेयरमैन और पूर्व आईआरएस अधिकारी रतन सिंह रावत ने बताया कि नए वर्ष के शुभारंभ पर इस तरह के आयोजन का उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति और पारंपरिक खानपान को देशभर में पहचान दिलाना है।

महोत्सव के मुख्य अतिथि,:- उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपने संबोधन में उत्तराखंड की लोक संस्कृति, खानपान, और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘उत्तराखंड की संस्कृति और खानपान हमारी अमूल्य विरासत हैं। हमें इन्हें देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान देना होगा।’

सम्मान और चर्चा :- इस अवसर पर जौनसार बावर के प्रमुख हस्तियों को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इनमें रतन सिंह रावत (पूर्व आईआरएस), कुलानंद जोशी (पूर्व आईएएस), गंभीर सिंह चैहान (आईजी, आईटीबीपी), और मायाराम शर्मा (समिति अध्यक्ष) शामिल थे। महोत्सव में लोक संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा, और पर्यावरण पर आयोजित चर्चा ने आयोजन को और भी खास बना दिया। उत्तराखंड प्रवासी और दिल्ली के गणमान्य व्यक्तियों ने इस अवसर पर उत्तराखंड की विरासत को करीब से जानने और अनुभव करने का आनंद लिया।

संस्कृति के संरक्षण की पहल:- जौनसार बावर जनजाति कल्याण समिति और पर्वतीय कला केंद्र के इस प्रयास ने यह साबित कर दिया कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराएं आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। इस तरह के आयोजन देश के अन्य हिस्सों में उत्तराखंड की संस्कृति को लोकप्रिय बनाने का माध्यम बन सकते हैं।