देहरादूनI (M. Faheem ‘Tanha’) : दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के परियोजना के निर्माण के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक एहतियाती उपाय अपनाए गए हैं। इसके अंतर्गत साउंड बैरियर एवं प्रकाश (लाइट) बैरियर जैसी व्यवस्थाएं की गई है, जिससे वन्यजीवों पर शोर एवं प्रकाश प्रदूषण का प्रभाव न्यूनतम हो सके।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन से पूर्व इसके संबंध में एक महत्वपूर्ण मीडिया ब्रीफिंग की गई। इस अवसर पर वन मंत्री, (उत्तराखण्ड) द्वारा दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण से वन एवं वन्यजीवों को होने वाले लाभों के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
इस प्रेस ब्रीफिंग के अवसर पर प्रमुख वन संरक्षक (Hoff) रंजन मिश्रा, Pccf कपिल लाल, apccf विवेक पांडेय, ccf धीरज पांडेय और निदेशक जिम कार्बेट साकेत बडोला, cf शिवालिक राजीव धीमान, dfo देहरादून नीरज शर्मा भी मौजूद रहेI
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि इस परियोजना का आखिरी 20 किलोमीटर भाग उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग एवं उत्तराखण्ड के राजाजी टाइगर रिजर्व व देहरादून वन प्रभाग के घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरता हैI तथा यह परियोजना विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने अवगत कराया कि उत्तराखण्ड व उत्तर प्रदेश में इस परियोजना के अंतर्गत वन भूमि के हस्तांतरण के सापेक्ष व्यापक स्तर पर कुल 165.5 हेक्टर क्षेत्र में प्रतिपूरक वृक्षारोपण कार्य किया गया हैI जिसमें 1.95 लाख पेड़ लगाए गए हैंI साथ ही सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी निर्देशन में 40 करोड़ रुपए की अतिरिक्त धनराशि से वन एवं वन्यजीव संरक्षण हेतु इको-रेस्टोरेशन के विभिन्न कार्य भी किए जा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 11 हजार पेड़ काटे गए हैं I
उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में एशिया का सबसे लंबा लगभग 12 किलोमीटर का एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर निर्मित किया गया है, जो विशेष रूप से वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन हेतु विकसित किया गया है जिसमें हाथी अंडरपास एवं अन्य वन्यजीव पास का भी निर्माण किया गया है, जिससे वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
वन मंत्री ने यह भी बताया कि इस एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी तथा वन्यजीवों के सुरक्षित एवं सुगम आवागमन को बढ़ावा मिलेगा। इससे विभिन्न प्रजातियों के बीच बेहतर आनुवंशिक आदान-प्रदान (Gene Pool) संभव होगा, जो जैव विविधता के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कॉरिडोर के निर्माण से अगले 20 वर्षों में 2.44 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आयेगी जो कि लगभग 60-65 लाख वृक्षों के द्वारा किए जाने वाले कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण (Sequestration) के समान है, साथ ही 19 प्रतिशत ईधन की बचत भी होगी।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल परिवहन को सुगम बनाते हुए यात्रा समय में कमी लाएगी, बल्कि पर्यटन, व्यापार एवं स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगी, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि दिल्ली देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास एवं पारिस्थितिक संतुलन स्थापित करने का एक आदर्श उदाहरण है, जो भविष्य की अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।


