Consulting Editor : Mo Faheem ‘Tanha
देहरादून, 12 अक्टूबर(Big news today)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज हरिद्वार में गंगा तट पर स्थित मेला नियंत्रण भवन में आयोजित प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सरकार के प्रमुख के रूप में राष्ट्रसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया। मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सेवाकाल को सेवा, सुशासन, संकल्प, समर्पण और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना का प्रतीक बताते हुए उनके नेतृत्व में देश और उत्तराखण्ड में हुए विकास कार्यों तथा जनकल्याणकारी पहलों की सराहना की। मंत्रिमंडल ने प्रदेश की जनता की ओर से प्रधानमंत्री को इस महत्वपूर्ण अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
धन्यवाद प्रस्ताव में उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी। सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्षों की इस निरंतर यात्रा में उन्होंने देशहित और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री ने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाते हुए सदैव राष्ट्रनीति को राजनीति से ऊपर रखा है। उनका अनुशासन, अथक परिश्रम, कार्य के प्रति समर्पण और बिना रुके, बिना थके राष्ट्रसेवा की प्रतिबद्धता सभी के लिए प्रेरणादायी है।
मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में जनकल्याण, बुनियादी ढांचे, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्र में हुए महत्वपूर्ण कार्यों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ को शासन का आधार बनाया है। जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं से करोड़ों लोगों को लाभ मिला है।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लगभग 60 करोड़ जनधन खाते खोले गए हैं और चार करोड़ से अधिक पक्के आवास उपलब्ध कराए गए हैं। वर्ष 2013-14 से 2022-23 के बीच लगभग 25 करोड़ देशवासी बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं। महिलाओं, किसानों और युवाओं के सशक्तिकरण के साथ ही डिजिटल इंडिया, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और यूपीआई जैसी पहलों ने नागरिक सुविधाओं को अधिक सुगम बनाने तथा शासन व्यवस्था में पारदर्शिता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
धन्यवाद प्रस्ताव में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने, पूर्व सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन लागू करने और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद सृजित करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों का भी उल्लेख किया गया। चंद्रयान-3 की सफलता, स्वदेशी तकनीक को प्रोत्साहन और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका को देश की बढ़ती सामर्थ्य और आत्मविश्वास का प्रतीक बताया गया। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘विकास भी, विरासत भी’ की भावना के साथ देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं।
धन्यवाद प्रस्ताव में उत्तराखण्ड की विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए सहयोग और मार्गदर्शन का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। प्रदेश में जब भी कोई बड़ी आपदा आई, प्रधानमंत्री ने स्वयं संपर्क कर परिस्थितियों की जानकारी ली और राहत एवं बचाव कार्यों के लिए हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया। संकट के समय प्रधानमंत्री ने एक अभिभावक की तरह प्रदेश के साथ खड़े रहकर समस्याओं के समाधान के लिए भी मार्गदर्शन दिया।
नवंबर 2023 में उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए चले 17 दिवसीय बचाव अभियान के दौरान प्रधानमंत्री लगातार जानकारी लेते रहे और केंद्र की संबंधित एजेंसियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसी प्रकार वर्ष 2024 में सहस्त्रताल और केदारनाथ यात्रा मार्ग पर आई आपदाओं के दौरान केंद्र सरकार एवं भारतीय वायुसेना ने बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। अगस्त 2025 में उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में आई भीषण आपदा के समय भी प्रधानमंत्री ने तत्काल स्थिति की जानकारी ली और हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। मंत्रिमंडल ने आपदा की प्रत्येक घड़ी में प्रधानमंत्री के सहयोग को प्रदेश के प्रति उनकी आत्मीयता और संवेदनशीलता का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
प्रधानमंत्री ने 14 अप्रैल 2026 को दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे का लोकार्पण किया। लगभग 213 किलोमीटर लंबे इस आर्थिक गलियारे के शुरू होने से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा का समय छह घंटे से अधिक से घटकर लगभग ढाई घंटे रह गया है। इससे प्रदेश में पर्यटन, व्यापार, उद्योग और रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
लगभग 12,595 करोड़ रुपये की चारधाम महामार्ग विकास परियोजना से चारधाम यात्रा की कनेक्टिविटी बेहतर हो रही है। वहीं, 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर्वतीय क्षेत्रों तक रेल पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। लगभग 4,081 करोड़ रुपये की सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे परियोजना और 2,730 करोड़ रुपये की गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना को मिली स्वीकृति से भविष्य में श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुगम होगी। केदारनाथ पुनर्निर्माण और बदरीनाथ धाम के मास्टर प्लान के अंतर्गत किए जा रहे कार्य भी प्रधानमंत्री के ‘विकास भी, विरासत भी’ के संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं।
प्रधानमंत्री के सहयोग से दशकों से लंबित जमरानी बांध, लखवाड़ और किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। टिहरी में 1,000 मेगावाट क्षमता का पंप्ड स्टोरेज प्लांट ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ऊधमसिंह नगर के खुरपिया में विकसित किए जा रहे एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर से निवेश और रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। किच्छा में एम्स ऋषिकेश का सैटेलाइट सेंटर विकसित होने से कुमाऊं और तराई क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री की आदि कैलाश यात्रा और शीतकालीन पर्यटन को दिए गए प्रोत्साहन का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री की आदि कैलाश यात्रा के बाद सीमांत क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिली है। आदि कैलाश और ॐ पर्वत क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से स्थानीय होमस्टे, परिवहन, हस्तशिल्प और स्वरोजगार को प्रोत्साहन मिला है। प्रधानमंत्री ने सीमांत गांवों को देश के अंतिम गांव के बजाय प्रथम गांव के रूप में नई पहचान दी है। वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के 51 सीमांत गांवों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया गया है।
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में शीतकालीन यात्रा को भी विशेष प्रोत्साहन दिया है। 6 मार्च 2025 को प्रधानमंत्री स्वयं माँ गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखवा पहुंचे और हर्षिल से देशवासियों को शीतकाल में उत्तराखण्ड आने का आह्वान किया। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। शीतकालीन यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या लगभग 80 हजार से बढ़कर डेढ़ लाख तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री की लखपति दीदी की परिकल्पना से प्रदेश में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को भी नई दिशा मिली है।
धन्यवाद प्रस्ताव में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सरकार के प्रमुख के रूप में राष्ट्रसेवा के 25 वर्षों को देश के विकास, जनकल्याण और राष्ट्रीय आत्मविश्वास की यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया गया। मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में विकास और विरासत, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण तथा आधुनिकता और संस्कृति के बीच संतुलन स्थापित करते हुए उत्तराखण्ड को विकसित राज्य बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में विकसित उत्तराखण्ड अपनी पूरी सामर्थ्य के साथ योगदान देगा।




