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बदरीनाथ मंदिर में नहीं होती शंख ध्वनि

Dehradun


Consulting Editor : Mo Faheem ‘Tanha’
देहरादून(Big news today)। बदरीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित है और शंख भगवान काे अत्यंत प्रिय है। विष्णु भगवान के सभी मंदिरों में शंख ध्वनि होती है, मगर बदरीनाथ मंदिर में शंख ध्वनि नहीं होती है। जबकि बदरीनाथ मंदिर में नित्य पूजा, अभिषेक व महाभिषेक शंख से ही की जाती है और भगवान बदरीनाथ, महालक्ष्मी, नर-नारायण व कुबेर देवता का भोग शंख के द्वारा ही पवित्र किया जाता है और तब ही भगवान भोग स्वीकार करते हैं। किवदंती है कि बदरीनाथ मंदिर में शंख बजाने पर बातापी नाम का राक्षस जागृत हो जाएगा। बताते हैं कि इसी मान्यता के चलते धाम में शंख बजाना वर्जित माना गया है। आदिकाल में जब हिमालय क्षेत्र में राक्षसों का बोलबाला हो गया था, तब महर्षि अगस्त्य ने अपनी क्रोधाग्नि से कुसमांडा देवी का ध्यान किया। देवी मां के प्रकट होने पर राक्षसों का वध किया गया। इसी दौरान आतापी और बातापी नाम के दो राक्षस भागने में सफल हुए। आतापी नाम का राक्षस मंदाकिनी नदी में और बातापी राक्षस बदरीनाथ मंदिर में शंख में जा छिपा। तब से यहां शंख नहीं बजता है। किवदंती है कि यदि यहां शंख बजा तो दैंत (राक्षस) प्रकट हो जाएगा।

विश्‍व विख्‍यात भगवान विष्‍णु के पावन धाम बदरीनाथ में शंख नहीं बजाया जाता है। बदरीनाथ धाम भगवान नारायण तपोस्‍थली के रूप में माना जाता है। यह उत्‍तराखंड के चार धाम में से एक है। य‍ह मंदिर अपने आप में अनोखे रहस्‍यों को समेटे हुए है। ऐसी ही एक रोचक बात यह है कि यहां पूजा के दौरान शंख बजाना मना है। वो भी तब जब भगवान विष्‍णु की प्रिय वस्‍तुओं में से एक है शंख। उसके बावजूद यहां विष्‍णु भगवान के बदरीनाथ धाम में शंख बजाकर पूजा नहीं की जाती है।

शास्त्रों में कहानी मिलती है की एक बार लक्ष्मी जी बद्रीनाथ के तुलसी भवन में ध्यान कर रही थीं। उसी समय, भगवान विष्णु ने शंखचूर्ण नाम के एक राक्षस को मारा था, हिन्दू धर्म में जीत होने पर शंख बजाते हैं, पर विष्णु जी लक्ष्मी जी के ध्यान को भंग नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने शंख नहीं बजाया।

बदरीनाथ धाम के आसपास का क्षेत्र अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है और इसे नारायण भगवान का तपस्थल माना जाता है। एक मान्यता के अनुसार एक बार जब भगवान विष्णु ने यहां तपस्या की थी, तो शंखनाद करने पर उस ध्वनि से देवताओं की साधना भंग हो सकती थी, इसलिए इस स्थान को शांत क्षेत्र माना गया और यहां शंख बजाना वर्जित कर दिया गया।

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