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शिक्षा का क्षेत्र असीमित और निरंतर सीखने का क्षेत्र : राज्यपाल

Dehradun


भारत-मेक्सिको सहयोग को मजबूत करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर

Consulting Editor : Mo Faheem ‘Tanha’

देहरादून 12 सितम्बर(Big news today)। दून विश्वविद्यालय और सेंटर फॉर रिसर्च एंड एडवांस्ड स्टडीज (सिनवेस्टाव), मेक्सिको ने अंतर्राष्ट्रीय एकेडमिक सहयोग और साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) पर हस्ताक्षर किए हैं। 1961 में स्थापित सिनवेस्टाव नेचुरल साइंसेज, इंजीनियरिंग और ह्यूमैनिटीज के क्षेत्र में उन्नत शोध के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखता है। एक स्वायत्त, केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित सार्वजनिक शोध संस्थान के रूप में सिनवेस्टाव मेक्सिको में 11 परिसरों के नेटवर्क के माध्यम से कार्य करता है। इस साझेदारी का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक, वैज्ञानिक और शोध सहयोग को बढ़ावा देना तथा उच्च शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित, ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंसेज के क्षेत्र में भारत और मेक्सिको के बीच सहयोग को और मजबूत करना है।

लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि.), दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की मैक्सिको में डिप्टी चीफ ऑफ मिशन श्रीमती दीप्ति गांजी, सिनवेस्टाव के डायरेक्टर जनरल प्रो. अल्बर्टाे सांचेज हर्नांडेज, सिनवेस्टाव की इंटरनेशनल रिलेशंस कोऑर्डिनेटर प्रो. मार्था एस्पिनोसा (सभी वर्चुअल रूप से) तथा दून विश्वविद्यालय के रिसर्च एंड डेवलपमेंट डायरेक्टर डॉ. अरुण कुमार सहित सिनवेस्टाव के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, फैकल्टी सदस्य और शोधकर्ता उपस्थित रहे। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का क्षेत्र असीमित और निरंतर सीखने का क्षेत्र है। अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से एक-दूसरे के अनुभव और ज्ञान से सीखने के नए अवसर मिलते हैं।

दून विश्वविद्यालय और सिनवेस्टाव के बीच यह समझौता शोध के विभिन्न पहलुओं को एक साथ जोड़ने और दोनों देशों के संस्थानों के बीच सहयोग को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित होगा। राज्यपाल ने कहा कि इस साझेदारी से शोध के स्तर को बेहतर बनाने, नए पेटेंट विकसित करने और उनके व्यावसायीकरण की दिशा में भी अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ ही भारत और मेक्सिको की सभ्यताओं, संस्कृति और ज्ञान परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा। यह केवल अकादमिक सहयोग ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी है।

उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति, फैकल्टी सदस्यों और शोधकर्ताओं को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। राज्यपाल ने सिनवेस्टाव के डायरेक्टर जनरल प्रो. अल्बर्टाे सांचेज हर्नांडेज तथा मैक्सिको स्थित भारतीय दूतावास की डिप्टी चीफ ऑफ मिशन श्रीमती दीप्ति गांजी के सहयोग और समन्वय की सराहना की। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से उत्तराखण्ड की शिक्षा और शोध को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी। उन्होंने राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों से भी इस दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया, ताकि उत्तराखण्ड की उच्च शिक्षा को नए स्तर तक ले जाया जा सके।

दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि सहयोग के संभावित क्षेत्रों में संयुक्त शोध गतिविधियां, संयुक्त शोध परियोजनाएं, फैकल्टी और शोधकर्ताओं का आदान-प्रदान, विद्यार्थियों की आवाजाही, संयुक्त सेमिनार, कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप का आयोजन, संयुक्त एकेडमिक प्रोग्राम्स का विकास तथा संयुक्त डिग्री प्रोग्राम्स की संभावना तलाशना शामिल है।

उन्होंने बताया कि कंप्यूटर साइंस, फिजिक्स, मैथमेटिक्स, इकोनॉमिक्स, कल्चर, डिजाइन, बायोलॉजिकल साइंसेज, एनवायर्नमेंटल साइंसेज, साइकोलॉजी और अर्बन डेवलपमेंट मैनेजमेंट जैसे विषयों में भी दोनों संस्थान मिलकर कार्य करेंगे। समारोह में दून विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार दुर्गेश डिमरी, प्रोफेसर आर.पी. ममगाईं, प्रोफेसर बी.एस. बिष्ट, डॉ. हिमानी शर्मा और डॉ. चारू द्विवेदी सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी, फैकल्टी सदस्य और शोधकर्ता उपस्थित रहे।

 

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