Consulting Editor: Mohd Faheem ‘Tanha’
उत्तराखंड के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने हैदराबाद में राष्ट्रीय पोषण संस्थान का किया दौरा
मंडुआ, झंगोरा, चौलाई और कोदा जैसे स्थानीय अनाजों के पोषक तत्वों पर शोध जारी: डॉ. भारती कुलकर्णी
कम उम्र से ही स्वस्थ खान-पान की आदतें विकसित करने पर जोर, बच्चों में बढ़ते मोटापे को लेकर जताई चिंता
हैदराबाद, (Big News Today): 02 सितंबर 2026। उत्तराखंड के 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को हैदराबाद स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) का दौरा किया। पांच दिवसीय हैदराबाद प्रेस स्टडी टूर के दूसरे दिन हुए इस दौरे में पत्रकारों को देश में पोषण अनुसंधान, जन स्वास्थ्य शिक्षा और राष्ट्रीय पोषण नीतियों के निर्माण में संस्थान की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।

आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी ने पत्रकारों से संवाद करते हुए खाद्य पदार्थों की संरचना, शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों और संतुलित आहार संबंधी दिशा-निर्देशों पर किए जा रहे शोध की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इंडियन फूड कंपोजिशन टेबल्स में देश में उपलब्ध विभिन्न खाद्य पदार्थों में ऊर्जा, प्रोटीन, सूक्ष्म पोषक तत्वों और खनिजों की विस्तृत जानकारी संकलित की गई है। इसका उपयोग शोधकर्ताओं, खाद्य उद्योग और जन स्वास्थ्य नीति बनाने वाले विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है।
डॉ. कुलकर्णी ने कहा कि स्वस्थ खान-पान की आदतों का विकास कम उम्र से ही किया जाना चाहिए। उन्होंने दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों के आहार में अतिरिक्त चीनी से बचने की सलाह से जुड़े दिशा-निर्देशों का भी उल्लेख किया।
बच्चों में बढ़ते मोटापे को लेकर चिंता
डॉ. कुलकर्णी ने कुपोषण के दोहरे बोझ पर चिंता जताते हुए बच्चों में बढ़ते अधिक वजन और मोटापे की समस्या को गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि निष्क्रिय जीवनशैली और वसा, चीनी तथा नमक की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
उन्होंने खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया। उनके अनुसार, केवल पर्याप्त भोजन उपलब्ध होना बेहतर पोषण की गारंटी नहीं है। इसके लिए भोजन में विविधता और स्वस्थ खान-पान से जुड़े व्यवहार में सकारात्मक बदलाव भी जरूरी हैं।
उत्तराखंड के मोटे अनाजों पर हो रहा शोध
उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए डॉ. भारती कुलकर्णी ने बताया कि राज्य के स्थानीय कृषि उत्पादों और मोटे अनाजों के पोषण संबंधी गुणों का अध्ययन किया जा रहा है। इनमें मंडुआ, झंगोरा, चौलाई और कोदा जैसे पारंपरिक अनाज शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि रागी यानी फिंगर मिलेट के सेवन का एनीमिया पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के लिए नैदानिक और विश्लेषणात्मक अध्ययन भी किए जा रहे हैं।

पोषण संबंधी भ्रांतियों को दूर करने में मीडिया की भूमिका
मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने पोषण सूचना, संचार एवं स्वास्थ्य शिक्षा प्रभाग के प्रमुख और वैज्ञानिक-जी डॉ. सुब्बा राव के तकनीकी सत्र में भी हिस्सा लिया।
डॉ. सुब्बा राव ने देश में अल्पपोषण, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और जीवनशैली से जुड़े चयापचय संबंधी विकारों जैसी पोषण संबंधी चुनौतियों पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पोषण संबंधी जानकारी और आम लोगों की रोजमर्रा की खान-पान की आदतों के बीच अंतर को कम करने में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने पत्रकारों से खाद्य पदार्थों और पोषण से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने तथा वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित स्वस्थ आहार संबंधी जानकारी को जनता तक पहुंचाने की अपील की।

अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का किया भ्रमण
मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने आईसीएमआर-एनआईएन की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का भी भ्रमण किया। इस दौरान पत्रकारों ने शोधकर्ताओं से संवाद कर खाद्य विश्लेषण और लिपिड रसायन विज्ञान के क्षेत्र में चल रहे अनुसंधान कार्यों की जानकारी ली।
सालार जंग संग्रहालय भी पहुंचे पत्रकार
हैदराबाद प्रेस स्टडी टूर के सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत प्रतिनिधिमंडल ने सालार जंग संग्रहालय का भी दौरा किया। पत्रकारों ने संग्रहालय में संरक्षित ऐतिहासिक और अभिलेखीय संग्रहों को देखा और हैदराबाद की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी प्राप्त की।



