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जब पत्रकार बना देवदूत और खाकी बनी ढाल

Dehradun Uttarakhand






पत्रकार की सतर्कता ने मासूम को मिलाया बिछड़े परिवार से
चमोली। कहते हैं कि अगर इंसानियत जिंदा हो, तो भटकते हुए कदम भी अपनी मंजिल पा ही लेते हैं। बीती रात बुसडीपुल सिमलसैण के पास एक 13 साल का बालक अनजान राहों पर भटकता हुआ मिला। वह डरा हुआ था और अपना पता बताने में असमर्थ था। इसी बीच, सिमलसैण निवासी पत्रकार गिरीश चन्द्र चन्दोला की नजर उस पर पड़ी। रात के अंधेरे में बच्चे को अकेला छोड़ना किसी खतरे से कम न था, लिहाजा गिरीश जी ने एक अभिभावक का फर्ज निभाते हुए उसे रातभर अपने घर पर सुरक्षित रखा।


आज सुबह होते ही गिरीश जी ने थाना थराली को सूचना दी। थानाध्यक्ष थराली विनोद चौरसिया के नेतृत्व में पुलिस टीम और पत्रकार गिरीश ने मिलकर बच्चे के घर की खोजबीन शुरू की। कड़ी मशक्कत और सूचना तंत्र के जरिए पता चला कि बच्चा देवाल क्षेत्र का रहने वाला है । इसके बाद परिजनों को थाना थराली बुलाया गया।पूछताछ में परिजनों द्वारा बताया गया कि गांव में अन्य बच्चों से विवाद होने पर गोकुल डर के कारण घर से चला गया था, जिसकी तलाश परिजन भी लगातार कर रहे थे।


थानाध्यक्ष विनोद चौरसिया ने न केवल बच्चे के मन से डर निकाला, बल्कि माता-पिता को भी नसीहत दी कि— “बच्चे डाँट से नहीं, दुलार से सुधरते हैं।” उन्होंने परिजनों को समझाया कि बच्चों को इतना न डराएं कि वे खुद को असुरक्षित महसूस करने लगें।


इस पूरे रेस्क्यू में पत्रकार गिरीश चन्द्र चन्दोला जी का योगदान मिसाल के काबिल है। चमोली पुलिस ऐसे सजग नागरिकों को सलाम करती है जो वर्दी के साथ कदम से कदम मिलाकर समाज की सेवा कर रहे हैं।

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