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बड़ा सवाल: जलनिगम क्या सरकार की सिरदर्दी बढ़ाने लगा है? फिर शुरू हुआ धरना!

Uttarakhand


फोटो: जलनिगम परिसर में धरना

देहरादून (Big News Today)
उत्तराखंड पेयजल निगम सरकार पर एक बोझ की तरह लगने लगा है, पेयजल योजनाओं के निर्माण के अलावा कई अन्य अवस्थापना निर्माण कार्यों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के बावजूद जलनिगम में कर्मचारियों के वेतन का बैकलॉग चलता रहता है। अक्सर आंदोलन पर रहने वाले अधिकारी-कर्मचारी अब निगम को सरकारी विभाग बनाने के लिए आंदोलन छेड़ रखा है। जलनिगम अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त समन्यव समिति 28 अक्टूबर से हड़ताल पर जाने की तैयारी कर चुके हैं। आज से 3 दिन की प्री-स्ट्राइक आंदोलन शुरू कर चुके हैं।

उत्तराखंड जलनिगम मुख्यालय परिसर में अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त समन्यव समिति के बैनर तले अधिकारी-कर्मचारी धरने पर बैठ गए हैं। अध्यक्ष रामकुमार सेनिवाल और सचिव जितेंद्र देव का कहना है कि 27जुलाई 2021 को शासन-सरकार को हड़ताल का नोटिस दिया गया था लेकिन निगम को राजकीय विभाग बनाने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। ऐसा लगता है कि जिम्मेदार अफसर जलनिगम कर्मचारियों को हड़ताल पर ही भेजने पर आमादा हैं। उनका कहना है कि 27 अक्टूबर तक यदि निगम को राजकीयकरण करने और अन्य कर्मचारी हिट की मांगें पूरी ना होनर अर 28 अक्टूबर से हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। क्योंकि कई वर्षों से जलनिगम को सरकारी विभाग बनाने की मांग की जा रही है।

उधर जलनिगम को राजकीय विभाग बनाने की जिद मांग को लेकर विभागीय मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने मंगलवार को 11बजे विधानसभा में अधिकारियों की बैठक बुलाई है।

जलनिगम मुख्यालय परिसर में शुरू किए गए धरने में विभिन्न अभियंता और कर्मचारी शामिल हुए जिनमें इं.एससी पंत, इं. सीताराम, महासचिव विजय खाली, इं. सौरभ शर्मा, अजय बेलवार, मौ. मीसम, राजेश सिंह, केके रस्तौगी, इं.पल्लवी, इं. अंजली पंवार, इं. मीनाक्षी खंडूरी, इं. मीशा सिन्हा, एसके बर्नवाल, हेमचंद्र जोशी, इं. एम. हसन भी शामिल हुए।